स्व. केदार सिंह के परिवार से खाली कराने के चलते चर्चा में आयी जमीन की कीमत 500 करोड़ से अधिक है।
आजकल गोरखपुर की जिस जमीन की चर्चा है, उसकी कीमत चौंका देगी। शहर की यह सबसे महंगी जमीन है। वर्तमान बाजार मूल्य 500 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। उद्यमी के पक्ष में यह जमीन खाली हो गई है और अब यहां कोई बड़ा प्रोजेक्ट देखने को मिलेगा। 95000 वर्ग फी
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स्व. केदार सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के लिए सीएम के रूप में अखिलेश यादव भी पहुंचे थे।
पहले जानिए क्यों चर्चा में है यह जमीन
इस जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद था। 22 साल पुराना विवाद अब खत्म हो चुका है। दरअसल नजूल की इस संपत्ति को शहर के उद्यमी ओमप्रकाश जालान की कंपनी ने फ्री होल्ड कराया और 2003 में रजिस्ट्री करा ली। जिस दौरान यह जमीन फ्री होल्ड करायी गई, इस बंगले में पूर्व विधायक केदार सिंह परिवार सहित रहते थे। सैंथवार समाज के बड़े नेता केदार सिंह यहां रहने का किराया देते थे। जमीन की जब रजिस्ट्री हो गई तो 5 साल इंतजार किया गया।
इसके बाद उद्यमी कोर्ट में चले गए। 2012 तक केदार सिंह ने यह केस लड़ा और उसके बाद उनका निधन हो गया। पैरवी के अभाव में एक्स पार्टी आर्डर हुआ। उसके बाद यह मामला हाईकोर्ट होता हुआ सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने दूसरे पक्ष यानी पूर्व विधायक के बेटे को जगह खाली करने के लिए एक साल का समय दिया। समय भी फरवरी 2025 में पूरा हो गया। स्व. केदार सिंह के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा कि उन्होंने मकान खाली कर दिया है। 9 सितंबर को फिर सुनवाई है।

इस जमीन पर बने आवास में पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव भी पहुंचे थे।
यहां हुए जोरदार प्रदर्शन का कारण क्या था
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मकान खाली होना था। यहां स्व. केदार सिंह की एक प्रतिमा भी स्थापित की गई है। वह सैंथवार समाज के बड़े नेता थे। चर्चा उठी कि उनकी प्रतिमा को वहां से हटाया जा रहा है। इस सूचना पर पूरे मंडल से सैंथवार समाज के नेता यहां पहुंचे थे। सैंथवार मल्ल महासभा भी इसमें एक्टिव हो गई। 25 अगस्त को इस जमीन के पास जोरदार प्रदर्शन किया गया।
पुलिस को 36 लोगों को हिरासत में लेना पड़ा था। उसके बाद सभी को समझाया गया कि अभी उनकी प्रतिमा हटायी नहीं जाएगी। गंगा सिंह सैंथवार ने कहा कि स्व. केदार सिंह उनके समाज के लिए मसीहा हैं। उनके प्रयासों से ही सैंथवारों को आरक्षण मिल सकेगा।

इस जगह से स्व. केदार सिंह के परिवार के सारे सामान निकाले जा चुके हैं।
अब जानिए क्या कहां स्थित है यह जमीन यह चर्चित जमीन गोरखपुर के सबसे महत्वपूर्ण स्थल यानी गोलघर में है। गोलघर शहर का वह इलाका है, जहां जमीन सबसे महंगी है। यहां जमीन अब मिलने वाली भी नहीं है। आर्किटेक्ट मनीष मिश्र बताते हैं कि गोलघर क्षेत्र में आमतौर पर रजिस्ट्री नहीं होती है।
यहां अक्सर बिल्डर एग्रीमेंट से ही काम चलता है। इसलिए जमीन की कीमत का वास्तविक आकलन करना मुश्किल है। हां, 500 करोड़ रुपये से अधिक की यह जमीन हो सकती है। मनीष ने उम्मीद जताई कि इस जमीन पर शहरवासियों के लिए बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
प्रशासन या पुलिस का लेना-देना नहीं
यहां प्रदर्शन करने वाले प्रशासन और पुलिस पर आरोप लगा रहे थे। लेकिन इसमें प्रशासन व पुलिस का कोई योगदान नहीं था। सुप्रीम कोर्ट में दो पक्ष थे। उन्हीं के बीच केस चल रहा था। एसएसपी राजकरन नैय्यर ने बताया कि इस जमीन को खाली करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट का है। प्रशासन या पुलिस अपने मन से कुछ न कर रहे हैं। हंगामे की सूचना पर कुछ दिन पहले पुलिस मौके पर पहुंची थी।

स्व. केदार सिंह की प्रतिमा को चारो ओर से घेरा जा रहा था। मौके पर पहुंची पुलिस ने काम रुकवा दिया।
ढक रहे थे मूर्ति, अफवाह उड़ी हटा रहे; दौड़े पहुंचे इंसपेक्टर कैंट, पहरा बैठाया
कब्जा मिलने के बाद उद्यमी की ओर से यहां कुछ काम शुरू कर दिया गया है। उसी के तहत शनिवार को स्व. केदार सिंह की प्रतिमा को घेरा जा रहा था। ऐसा करने वालों का दावा था कि सुरक्षा के लिहाज से ऐसा किया जा रहा है। लेकिन किसी ने आला अधिकारियों को बता दिया कि मूर्ति हटायी जा रही है। इस अफवाह के बाद कैंट इंस्पेक्टर संजय सिंह भागते हुए वहां पहुंचे। पहुंचने पर देखा कि तीन ओर से मूर्ति को ढक दिया गया है। उन्होंने तुरंत काम रुकवाया और आला अधिकारियों को स्थिति की जानकारी ली। इसके बाद वहां पुलिस व पीएसी के जवानों का पहरा बैठा दिया गया।