नपा दुकानों से किराया वसूलने के लिए अभियान चला रही है।
नगरपालिका इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रही है। इस कारण दैनिक वेतन भोगियों से लेकर नियमित कर्मचारियों तक को वेतन में 2 से 3 महीने की देरी हो रही है। यह स्थिति नगरपालिका के राजस्व में कमी और बकाया वसूली की प्रक्रिया पर निर्भरता के कारण पैदा हुई है।
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नगरपालिका में 300 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। इनमें नियमित और दैनिक वेतन भोगी दोनों शामिल हैं। इन कर्मचारियों के वेतन पर हर महीने करीब एक करोड़ रुपए खर्च होते हैं। पिछले कई महीनों से वेतन देने में परेशानी आ रही है।
नपा ने वसूली की प्रक्रिया तेज की
नगरपालिका प्रशासन का कहना है कि शासन से मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि का अधिकांश हिस्सा लोन और अन्य खर्चों में चला जाता है। इससे वेतन का भुगतान करना मुश्किल हो गया है। हालात को सुधारने के लिए नगरपालिका ने बकाया वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी है।
12 से अधिक दुकानों पर तालाबंदी
हाल ही में, राजस्व अमले ने 12 से अधिक दुकानों पर तालाबंदी की। इनमें बकाया राशि का भुगतान नहीं करने वाले दुकानदारों को शामिल किया गया। नीरज सराफ, राजेश अग्रवाल और श्वेता पांडेय जैसे दुकानदारों पर लाखों का बकाया है।

किराया नहीं देने पर नपा ने आज 12 से अधिक दुकानों को सील कर दिया है।
दुकानों का 50 लाख किराया बकाया
नगरपालिका के अनुसार, 250 से अधिक दुकानें किराए पर संचालित की जा रही हैं। इनका कुल किराया 90 लाख रुपए से अधिक है। लेकिन अधिकांश दुकानदार समय पर किराया अदा नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण 50 लाख रुपए से अधिक का बकाया हो गया है।
दैनिक वेतन भोगियों को पिछले 3 महीने से वेतन नहीं मिला है। नियमित कर्मचारियों को भी 2 महीने से वेतन नहीं मिला है।
मुख्य नगर पालिका अधिकारी अक्षत बुंदेला ने बताया कि वे बकाया वसूली पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों को जल्द से जल्द वेतन का भुगतान किया जा सकेगा।