नई दिल्ली50 मिनट पहले
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दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे स्टार्टअप महाकुंभ में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और G20 शेरपा एवं नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत के भारतीय स्टार्टअप्स की आलोचना करने पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।
जहां गोयल ने इनोवेशन की कमी और डिलिवरी-बेस्ड बिजनेस मॉडल्स पर सवाल उठाए, वहीं कांत ने भारत को टेक्नोलॉजी कॉलोनी बनने से रोकने के लिए खुद के नए आइडियाज पर काम करने पर जोर दिया। गोयल ने चीन के साथ तुलना करते हुए यहां तक कहा कि, क्या हम सिर्फ दुकानदारी करेंगे?
इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्टार्टअप्स के को-फाउंडर्स और लोगों के रिएक्शन आ रहे हैं और इनकी आलोचना कर रहे हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री ने सारा ठिकरा कांग्रेस पर फोड़ दिया।
पीयूष गोयल बोले- कांग्रेस और उनके इको-सिस्टम वालों को कठिनाई हो रही केंद्रीय मंत्रर पीयूष गोचल ने भास्कर से कहा कि, मेरी स्टार्टअप वाली बात को लेकर कोई बयान सामने नहीं आए हैं। सिर्फ कांग्रेस और उनके इको-सिस्टम वालों को बड़ी कठिनाई हो रही है कि हमारे युवा और युवती इनते उत्साह के साथ स्टार्टअप्स से जुड़ रहे हैं।
मैं समझता हूं कांग्रेस को हमारे देश की सफलता, हमारे युवा और युवती की सफलता को देखकर तकलीफ होती है, इसीलिए उनको पचता नहीं है। हमारा संदेश हैं कि अब भारत स्टार्टअप में अच्छी तरक्की कर ली है और अब हमें बड़ी छलांग लेनी है। नई ऊंचाईयों तक जाना है।

आइए जानते हैं कि आखिर पीयूष गोयल का पूरा बयान क्या था और सोशल मीडिया पर लोग उनको लेकर क्या-क्या कह रहे हैं…
स्टार्टअप महाकुंभ में 03 अप्रैल 2025 को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि, ‘देश में कई स्टार्टअप फूड डिलीवरी और बेटिंग और फैंटेसी स्पोर्ट्स ऐप पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जबकि चीन में स्टार्टअप ईवी, बैटरी टेक्नीक, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रोबोटिक्स और ऑटोमेशन, ग्लोबल लॉजिस्टिक्स और डीप टेक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रहे हैं।’
- पीयूष गोयल ने सवाल किया कि ‘क्या देश तकनीकी प्रगति के लिए कोशिश करने के बजाय कम वेतन वाली गिग नौकरियों से हम और आप संतुष्ट है। क्या हमें आइसक्रीम या चिप्स बनाना है? दुकानदारी ही करना है। क्या हम सिर्फ डिलीवरी बॉय और डिलीवरी गर्ल बनाने में खुश हैं? अमन गुप्ता जरा शार्क टैंक में अपने विचार बदलो। क्या आप इसे स्टार्टअप कहते हैं…ये तो बिजनेस है और पैसा कमाने का बस एक तरीका है।’
- फूड डिलीवरी और हाइपरफास्ट लॉजिस्टिक्स तक सीमित: पीयूष गोयल ने कहा, ‘भारतीय स्टार्टअप सिर्फ फूड डिलीवरी और हाइपरफास्ट लॉजिस्टिक्स तक ही सीमित हैं। भारतीय स्टार्टअप फूड डिलीवरी ऐप, फैंसी आइसक्रीम, कुकीज, इंस्टेंट ग्रॉसरी डिलीवरी, बेटिंग और फैंटेसी स्पोर्ट ऐप और रील्स और इन्फ्लूएंसर इकोनॉमी बनाने में बिजी हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये वाकई इनोवेशन है, या सिर्फ सुविधा के नाम पर सस्ती मेहनत का उपयोग? उन्होंने यह भी माना कि भारत ने प्रगति की है, लेकिन अब भी हम ‘दुनिया के सर्वश्रेष्ठ’ नहीं हैं।
- बेरोजगार युवाओं को सस्ते मजदूर बना दिया : गोयल ने कहा, ‘आज के भारत के स्टार्टअप क्या हैं? हमारा फोक्स फूड डिलीवरी ऐप्स पर है, जहां बेरोजगार युवाओं को सस्ते मजदूर बना दिया गया है ताकि अमीर लोग बिना घर से निकले खाना मंगा सकें। उन्होंने आगे कहा, ‘हमें इस बात पर गर्व है कि भारत ने क्या कुछ हासिल किया है, लेकिन क्या हम अभी दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं? नहीं, अभी नहीं।’
- स्टार्टअप इकोसिस्टम को घरेलू पूंजी की जरूरत : देशों की तुलना करने वाली एक स्लाइड दिखाते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि, ‘भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को घरेलू पूंजी की जरूरत है। इसके लिए, यूनिकॉर्न और उद्योग एक फंड बना सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे दुख होता है जब मुझे पता चलता है कि 25 लाख रुपये या 50 लाख रुपये में एक युवा स्टार्टअप ने शानदार विचार किसी विदेशी कंपनी को बेच दिया गया। आइए कोशिश करें और इस इकोसिस्टम में कुछ और घरेलू पूंजी लाएं।’