MP said- we will not give it to Mukundpur, people said- include it in Rewa soon | मुकुंदपुर सफारी को लेकर रीवा-मैहर आमने-सामने: ग्रामीण रीवा से जुड़ने तैयार, सतना सांसद ने जताया विरोध, मैहर विधायक बोले-आंदोलन करेंगे – Rewa News

रीवा/मैहर। विंध्य क्षेत्र का गौरव, प्रदेश का इकलौता व्हाइट टाइगर सफारी, मुकुंदपुर, इन दिनों सियासी अखाड़े में फंसा हुआ है। एक तरफ राजनीतिक दल अपने-अपने प्रभाव क्षेत्र में बनाए रखने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ स्थानीय लोग विकास की आस मे

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यह विवाद मैहर के अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा अमरपाटन के राजस्व अधिकारी को भेजे गए एक पत्र के सामने आने के बाद शुरू हुआ। इसमें मुकुंदपुर सहित धौबाहट, अमीन, परसिया, आनंदगढ़ और पापरा गांवों को रीवा जिले में शामिल करने को लेकर राय मांगने के बारे में लिखा गया।

इस पत्र के बाद सतना सांसद गणेश सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर गांवों को रीवा में शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध किया। वहीं मैहर से पूर्व विधायक और विंध्य जनता पार्टी के संस्थापक नारायण त्रिपाठी ने उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला पर मुकुंदपुर को हथियाने का आरोप लगाया। वहीं मैहर विधायक ने मुकुंदपुर को मैहर से हटाने पर जेल भरो आंदोलन करने की बात कही है।

अतिरिक्त कलेक्टर मैहर द्वारा अमरपाटन के राजस्व अधिकारी को भेजे गए पत्र से विवाद हो गया।

अतिरिक्त कलेक्टर मैहर द्वारा अमरपाटन के राजस्व अधिकारी को भेजे गए पत्र से विवाद हो गया।

मुकुंदपुर को व्हाइट टाइगर सफारी ने दिलाई पहचान

मैहर जिले का एक छोटा सा गांव मुकुंदपुर अपनी पहचान व्हाइट टाइगर सफारी के कारण पूरे प्रदेश में रखता है। 2016 में स्थापित “महाराजा मार्तंड सिंह जूदेव सफेद बाघ सफारी और चिड़ियाघर” यहां का मुख्य आकर्षण है। यह सफारी 1951 में रीवा में पकड़े गए सफेद बाघ की याद में बनाया गया है, जिसे सफेद बाघों की वंश परंपरा की शुरुआत माना जाता है। सफारी में सफेद बाघों के अलावा अन्य वन्यजीव भी हैं, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

मैहर जिले का मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी के कारण जाना जाता है।

मैहर जिले का मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी के कारण जाना जाता है।

विवाद की जड़: परिसीमन का प्रस्ताव

विवाद की शुरुआत तब हुई जब मैहर के अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा अमरपाटन के राजस्व अधिकारी को भेजा गया एक पत्र वायरल हो गया। इस पत्र में मुकुंदपुर सहित धौबाहट, अमीन, परसिया, आनंदगढ़ और पापरा गांवों को रीवा जिले में शामिल करने को लेकर हितधारकों से राय मांगी गई थी। परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होते ही राजनीतिक दलों में खलबली मच गई।

सियासी घमासान: आरोप-प्रत्यारोप का दौर

मुकुंदपुर को अपने क्षेत्र में बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सतना से पांच बार के सांसद रहे भाजपा के गणेश सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर गांवों को रीवा में शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने इसे रीवा को फायदा पहुंचाने की ‘साजिश’ बताया। वहीं, मैहर से पूर्व विधायक और विंध्य जनता पार्टी के संस्थापक नारायण त्रिपाठी ने उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला पर मुकुंदपुर को हथियाने का आरोप लगाते हुए गंभीर आरोप लगाए।

कांग्रेस भी इस मामले में पीछे नहीं है। कांग्रेस विधायक और पूर्व डिप्टी स्पीकर राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि इस कदम का उद्देश्य सफारी के क्षेत्र का नियंत्रण पाना है। उन्होंने ऐलान किया कि वे गांधीवादी तरीके से आंदोलन करेंगे और “मैहर जेल भरो” अभियान के तहत 1000 सत्याग्रहियों के साथ जेल जाएंगे।

ग्रामीण की राय: रीवा में जुड़ने से होगा

मुकुंदपुर निवासी श्यामलाल साकेत का कहना है कि यहां के लोगों का काम बिना रीवा गए तो होता ही नहीं है। सतना और मैहर तो हमारे लिए एक मजबूरी की तरह है, हर काम के लिए तो हमें रीवा ही जाना पड़ता है। क्योंकि जनप्रतिनिधियों ने कभी ध्यान नहीं दिया और ना ही हमारे क्षेत्र का विकास किया। जो नेता 5 साल में एक बार मुंह दिखाने आते हैं, वो अब कह रहे हैं कि मुकुंदपुर को नहीं देंगे। आखिर अचानक उनका मोह क्यों जग गया।

शिवबली साकेत ने बताया कि हमारे क्षेत्र में बिजली की समस्या है। जब आपसे बात कर रहे हैं इस वक्त भी लाइट नहीं है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं भयंकर गर्मी वा उमस से बिना लाइट बीमार पड़ रहे हैं। उधर गांव में एक अस्पताल तो बनाया गया है, पर इलाज करने के लिए वहां डॉक्टर ही नहीं है। भला बिना डॉक्टर अस्पताल की खाली बिल्डिंग का क्या महत्व है। बहुत से पात्र लोगों को अब तक आवास नहीं मिला जबकि अपात्र लोगों को आसानी से आवास योजना का लाभ मिल गया है।

साकेत बोले- समस्याओं को सुनकर भी कर देते हैं अनसुना

बृहस्पति कुमार साकेत ने बताया कि कई बार जब अपनी समस्याओं को लेकर नेताओं से गुहार लगाते हैं तो वो सुनकर भी अनसुना कर देते हैं। हमें और हमारे क्षेत्र को विकास की जरूरत है जो आज तक नहीं मिल पाया। यही कारण है कि हम रीवा में शामिल होना चाहते हैं।

व्यापारी शैलेंद्र कुमार गुप्ता ने बताया कि यहां के 90 प्रतिशत लोग यही चाहते हैं कि रीवा मुकुंदपुर में शामिल हो जाए। लगातार आवाज उठ रही है मुकुंदपुर को रीवा जिले से जोड़ने के लिए उसका केवल एक ही कारण है कि यहां के लोगों का मानना है कि अब तक सतना और मैहर जिले में रहकर विकास नहीं हुआ तो अब रीवा जिले में कम से कम विकास तो होगा।

मुकुंदपुर जाने का रास्ता। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कोई विकास नहीं हुआ है।

मुकुंदपुर जाने का रास्ता। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कोई विकास नहीं हुआ है।

सुंदरलाल बोले-गांव में अभी तक मोबाइल नेटवर्क तक नहीं

पपरा गांव के सुंदरलाल कोल ने बताया कि हमारे गांव की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां आज तक मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाया है। हमारे गांव के लोगों ने फोन तो जरूर खरीद लिए हैं लेकिन अगर किसी को जरूरी काम करना हो तो मोबाइल नेटवर्क पाने के लिए कहीं दूर जाना पड़ता है। भला अगर किसी व्यक्ति को कोई इमरजेंसी हो या किसी की मदद की आवश्यकता हो तो किसी को फोन तक नहीं किया जा सकता। कारण कि गांव में मोबाइल नेटवर्क तक नहीं है. किसी गर्भवती महिला के लिए एंबुलेंस को सूचना देना हो तो भला कैसे दी जाए।

कुशल बोले-गांव जल्दी से रीवा में जुड़ जाए

कुशल प्रजापति ने बताया कि हम चाहते हैं हमारा गांव जल्द से जल्द रीवा जिले में जुड़ जाए। रास्ते की समस्या के साथ गांव के अस्पताल में बड़े-बड़े झाड़ उग चुके हैं। 7 साल पहले यहां एक डॉक्टर आते थे. फिर अचानक उनका आना बंद हो गया। अस्पताल के भीतर मवेशी बैठे रहते हैं। चारों तरफ गोबर है और अस्पताल के भीतर बड़े-बड़े झाड़ उग चुके हैं. अब वहां सांप और बिच्छू भी रहते हैं।

आनंदगढ़ के केशव प्रसाद सिंह ने बताया कि पहले से ही हर चीज के लिए रीवा पर ही आश्रित हैं। हम नाम मात्र या फिर केवल कहने के लिए रीवा जिले में हैं। इलाज के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल या सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चले जाते हैं। कॉलेज के लिए भी गांव के सभी बच्चे रीवा ही जाते हैं। मैहर में शिक्षा का स्तर अभी उतना अच्छा नहीं है। नौकरी भी करने के लिए भी युवा रीवा ही जाते हैं। मेरे खुद के बच्चे रीवा में नौकरी कर रहे हैं। इसलिए 90 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि रीवा में ही जल्द शामिल हो जाए।

मुरली यादव ने बताया कि इतने वर्षों में जो भी विकास कार्य होने चाहिए थे वो नहीं हो पाए हैं। अब जाकर गांव में सड़क बन पाई है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि रीवा में शामिल होने से हमारे क्षेत्र का समुचित विकास होगा।

बृजेश और विष्णु बोले-हमें मैहर में रहने दिया जाए

हालांकि, सभी गांव रीवा में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं। धोबाहट के बृजेश सिंह और विष्णु प्रताप ने कहा कि भले ही अन्य गांव के लोगों का रुझान रीवा की तरफ हो या वो शामिल होना चाहते हो, लेकिन हम चाहते हैं कि हमें मैहर में ही रहने दिया जाए। क्योंकि हम लोग पहले सतना जिले में आते थे। जिसके बाद हम अब मैहर जिला बनने के बाद मैहर जिले के निवासी हैं। लेकिन अब एक बार फिर यह निकलकर सामने आ रहा है कि हमें रीवा जिले में शामिल किया जा रहा है। बार-बार बदलाव करने से समस्या उत्पन्न हो रही है।

मुकुंदपुर के ग्रामीण परिसीमन को लेकर चौपाल पर चर्चा कर रहे हैं।

मुकुंदपुर के ग्रामीण परिसीमन को लेकर चौपाल पर चर्चा कर रहे हैं।

पुनर्गठन आयोग ने मैहर प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

पुनर्गठन आयोग ने मैहर जिला प्रशासन से इन 6 गांवों की भौगोलिक, आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक परिस्थितियों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग इस रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय करेगा कि इन गांवों को रीवा में शामिल किया जाए या नहीं।

सूत्रों की मानें तो, मुकुंदपुर को रीवा में शामिल करने का एक बड़ा कारण इसकी भौगोलिक निकटता है, क्योंकि टाइगर रिजर्व का मुख्य प्रवेश द्वार रीवा जिले से आसान पहुंच में है। वहीं, मैहर के लोग और जनप्रतिनिधि इसे जिले के गौरव और पर्यटन आय का महत्वपूर्ण स्रोत मानते हैं। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो गया, तो न केवल मैहर जिले की पर्यटन पहचान पर असर पड़ेगा, बल्कि राजस्व और रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं।

अपर कलेक्टर बोले- अभिमत लिया जा रहा है

मैहर अपर कलेक्टर शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि पत्र के माध्यम से विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त पत्र क्रमांक 3039 के अनुसार ग्राम पंचायत क्षेत्र आनंदगढ़, आमिन, धोबहट, मुकुन्दपुर, परसिया एवं पपरा को मैहर जिले से पृथक कर रीवा जिले में सम्मिलित करने के संबंध में प्राप्त आवेदन का अभिमत चाहा गया है। जिसमें जनप्रतिनिधियों,सभी पंचायतों के सरपंच और लोगों से बातचीत कर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आगे जैसे भी दिशा निर्देश वरिष्ठ कार्यालयों से प्राप्त होंगे। उसके तहत प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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