बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती जा रही है। इसी संदर्भ में कांग्रेस के सह प्रभारी शाहनवाज आलम द्वारा दिए गए बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने मुस्लिम और सामान्य जाति के व्यक्ति को डिप्टी मुख्य
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शाहनवाज आलम का बयान
उन्होंने सुझाव दिया कि बिहार में मुस्लिम और सामान्य जाति के व्यक्ति को डिप्टी सीएम बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह मांग सामाजिक संतुलन को दर्शाती है और किसी भी सेक्युलर दल को इससे आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
तौकीर आलम का समर्थन
उन्होंने शाहनवाज आलम के बयान को राजनीतिक दृष्टि से सही और सोच-समझकर दिया गया बताया। उन्होंने कांग्रेस की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी सभी जातियों और समुदायों को हिस्सेदारी देने की वकालत करती है। उन्होंने राहुल गांधी के “न्याय और इंसाफ” के संदेश को रेखांकित किया।
जेडीयू और बीजेपी पर तंज
तौकीर आलम ने जेडीयू और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दल मुस्लिम नेतृत्व को खत्म करने के बाद इसे पुनर्स्थापित करने के लिए कुछ खास नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कांग्रेस के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने बिहार में अब्दुल गफूर को मुख्यमंत्री बनाया था और महाराष्ट्र, असम, राजस्थान में भी मुस्लिम नेताओं को मुख्यमंत्री पद दिया।
राजनीतिक रणनीति
कांग्रेस इस बयान के जरिए मुस्लिम और सामान्य जाति के मतदाताओं को साधने की कोशिश करती दिख रही है। यह बयान आगामी चुनावों में कांग्रेस की समावेशी राजनीति और सामाजिक संतुलन को स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
संभावित प्रभाव
कांग्रेस के इस कदम से राज्य की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व की बहस तेज हो सकती है। जेडीयू और बीजेपी जैसे दल इस बयान का विरोध करते हुए इसे जातिगत और धार्मिक ध्रुवीकरण के प्रयास के रूप में देख सकते हैं। विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला बढ़ सकता है।