उदयसागर झील से मावली ब्लाॅक के सबसे बड़े बागाेलिया बांध काे भरा जाएगा। इसके लिए लिंक नहर बनाई जाएगी। बांध भरने से मावली के 17 गांवाें का 3676 हेक्टेयर एरिया सिंचित हाेगा। झील की क्षमता 1110 एमसीएफटी, जबकि बांध की क्षमता 686 एमसीएफटी है।
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झील से 180 एमसीएफटी पानी जिंक काे दिया जाता था, लेकिन वर्ष 2017 के बाद से इसे देना बंद कर दिया गया। इस बचे हुए पानी काे ही बांध में पहुंचाने का प्रस्ताव चल रहा था। झील से अभी निकल रही 14.8 किमी लंबी बाईं मुख्य नहर के हिस्से पर आगे नई नहर बनाई जाएगी।
यह 30 किमी की होगी। इसी के जरिये बांध काे भरा जाएगा। नहर की क्षमता 138 क्यूसेक की रहेगी। जल संसाधन विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्राेजेक्ट के लिए डीएमएफटी की ओर से विभाग काे 189.29 कराेड़ का बजट जारी हुआ है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 156.15 कराेड़ की लागत अाएगी।
पहाड़ी पर टनल बनाएंगे, लिफ्ट नहीं करना पड़ेगा पानी 30 किमी लंबी इस नहर के लिए 15 मीटर ऊंची पहाड़ी पर टनल बनाई जाएगी। इससे पानी काे लिफ्ट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मानसून सीजन में अलसीगढ़, आकाेदड़ा और मादड़ी बांध के भरने के बाद पिछाेला और फतहसागर झील काे भरा जाता है। इन तीनाें बांध के ओवरफ्लाे हाेने के बाद अतिरिक्त पानी बहकर गुजरात चला जाता है। इसी पानी काे बागाेलिया में डायवर्ट किया जाएगा।
1956 में बना बांध, सिर्फ एक बार 2006 में ही पूरा भरा साल 1956 में बना बागोलिया बांध मावली क्षेत्र में पेयजल एवं सिंचाई का एकमात्र बड़ा स्रोत है। यह बांध आखिरी बार वर्ष 2006 में ओवरफ्लाे हुआ था। इसके बाद बांध कभी भरा ताे कभी खाली रहा है। बांध भरने से आस-पास के एरिया का ग्राउंड वाटर रिचार्ज हाेने के साथ पेयजल और सिंचाई के लिए भी पर्याप्त मात्रा में पानी मिलेगा। हर साल इस बांध में डेड स्टाेरेज जितना पानी ही जमा हाेता है।