iNTERVIEW, It is not wise to think that the song will be a hit – Irshad Kamil ON SAIYAARA POPULARITY | गाना हिट होगा ये सोच लेना अक्लमंदी नहीं- इरशाद कामिल: सैयारा ट्रैक के राइटर बोले- सोशल मीडिया फॉलोअर्स दिला सकता है, लेकिन बने रहने के लिए टैलेंट जरूरी

11 मिनट पहलेलेखक: अमित कर्ण

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फिल्म सैयारा के गाने काफी पसंद किए गए हैं, जिन्हें इरशाद कामिल ने लिखा है। हाल ही में दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में इरशाद कामिल ने सैयारा टाइटल ट्रैक बनने, इसकी पॉपुलैरिटी और टारगेट ऑडियंस पर बात की है। उनका मानना है कि सैयारा कि सबसे अच्छी बात ये है कि इससे लिप-सिंक वाले गानों का ट्रेंड लौटा है।

पढ़िए लिरिसिस्ट इरशाद कामिल से हुई खास बातचीत के प्रमुख अंश-

सवाल- क्या इसकी उम्मीद थी कि फिल्म सैयारा और इसके गानों को इतनी बड़ी सफलता मिलेगी?

जवाब- मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि सैयारा फिल्म, इसका टाइटल सॉन्ग, संगीत, विशेष रूप से फिल्म के हीरो-हीरोइन को जनता ने इतना पसंद किया है। जब कोई फिल्म पूरे देश में पसंद की जाती है, तो मुझे लगता है कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री को इसका फायदा होता है और एक नई ऊर्जा का संचार होता है। सैयारा का इतना हिट होना बहुत अच्छी बात है। बाकी किसी भी गाने या फिल्म के बारे में यह दावा करना अक्लमंदी नहीं है कि यह बहुत बड़ी हिट होगी, भले ही आप कितने भी आश्वस्त क्यों न हों।

हमें पता था कि यह गाना लोगों को अच्छा लगेगा, लेकिन यह इस हद तक लोकप्रिय हो जाएगा, खासकर वर्ल्ड लेवल पर वायरल होगा, हमने ऐसा नहीं सोचा था। यह फिल्म इतिहास में पहली बार हुआ है, और यह जानकर बहुत खुशी हो रही है।

फिल्म सैयारा 18 जुलाई को रिलीज हुई है।

फिल्म सैयारा 18 जुलाई को रिलीज हुई है।

सवाल- क्या आप गाना लिखते हुए टारगेट ऑडियंस का ध्यान रखा था?

जवाब- हां, बिल्कुल। मैंने दर्शकों का पूरा ध्यान रखा था। जब आप युवा वर्ग के लिए लिखते हैं, जो अभी-अभी टीनएज से बाहर आए हैं, तो उनकी भाषा और उनकी बातें अलग होती हैं। उनकी भाषा उतनी गहरी नहीं होती जितनी 30 या 40 साल के लोगों की होती है। भाषा का संबंध हमारी उम्र के साथ होता है। जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमारी शब्दावली और सोच में बदलाव आता है। मैंने सैयारा में जिस तरह की भाषा और शब्दावली का इस्तेमाल किया है, वह पूरी तरह से नवयुवकों को ध्यान में रखकर किया गया है। यह अच्छी बात है कि उन्हें यह बहुत पसंद आया और उन्होंने इसे अपनाया।

सवाल- आज के युवाओं पर यह आम धारणा है कि वे प्यार को लेकर भ्रमित हैं और ‘सात जन्मों के प्यार’ जैसे कॉन्सेप्ट से प्रभावित नहीं होते। क्या आपने इन पहलुओं को ध्यान में रखा था?

जवाब- मुझे लगता है कि ‘सात जन्मों के प्यार’ का कॉन्सेप्ट एक थ्योरिटिकल कॉन्सेप्ट है, जिसका कोई व्यावहारिक सबूत (प्रैक्टिकल एविडेंस) नहीं है। आज के युवा इन सैद्धांतिक बातों को चुनौती दे रहे हैं। वे रियलिज्म में जीना चाहते हैं। अगर उन्हें कोई रिश्ता अच्छा लगता है, तो वह अच्छा लगता है। अगर नहीं लगता, तो नहीं लगता। आज से 20-25 साल पहले तक हम ऐसे रिश्ते भी निभाते थे जो हमें पसंद नहीं थे। आज के युवा रिश्तों को उनके यथार्थ रूप में देखते हैं। वे कोई झूठी या अत्यधिक काल्पनिक चीज नहीं चाहते। उनको वास्तविकता के करीब की चीजें चाहिए। आप ‘सात जन्मों के प्यार’ जैसी सैद्धांतिक बातें कहकर उन्हें बहका नहीं सकते।

सैयारा से अहान पांडे ने बॉलीवुड डेब्यू किया है।

सैयारा से अहान पांडे ने बॉलीवुड डेब्यू किया है।

सवाल- हमारी पुरानी फिल्में और गाने तो ‘जन्म-जन्मों के प्यार’ पर ही आधारित थे। क्या वह समय और आज का समय अलग है?

जवाब- हां, बिल्कुल। समाज हर 10-15 साल में बदलता है। जिस ‘सात जन्म के प्यार’ की आप बात कर रहे हैं, वह आज से 30-45 साल पहले बिल्कुल मान्य था। उस समय हम उतने तकनीकी रूप से उन्नत (टैक्सेवी) नहीं थे कि एक-दूसरे से रियल टाइम में बात कर सकें या मिल सकें। तो प्यार के लिए तड़प अलग थी। या जो चीज मुश्किल से मिलती है, उसे सहेज कर रखने की शिद्दत भी वैसी ही होती है। आज का युवा यथार्थ में जीना चाहता है, और यह बदलाव समाज के साथ-साथ आया है।

सवाल- क्या अहान पांडे और अनीत पड्डा ने भी आपको कोई क्रिएटिव इनपुट दिया था कि गाने में किस तरह के शब्द होने चाहिए?

जवाब- जब एक कहानी तय हो जाती है, तो बहुत सारी चीजें अपने आप ही तय हो जाती हैं। जैसे, अगर आप अपने किरदार की उम्र 20 से 23 साल के बीच रखते हैं, तो उनकी ड्रेसिंग सेंस, उनकी सोच और बात करने का तरीका भी उसी के हिसाब से तय हो जाता है। सैयारा में यही हुआ। कहानी के हिसाब से यह तय हो गया था कि इस फिल्म में नवयुवकों के लिए गाने होंगे। मुझे लगता है कि सैयारा की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें लंबे समय बाद लिप-सिंक वाले गाने वापस आए हैं। जब एक्टर गानों को खुद गाता है, तो वह ऑडियंस के साथ ज्यादा कनेक्ट कर पाता है, और यह बात सैयारा की सफलता में भी साफ दिखती है।

सवाल- हमारे कुछ बड़े गीतकारों ने गालिब जैसे पुराने शायरों की शायरी से प्रेरणा लेकर बहुत सुपरहिट गाने बनाए। क्या आप भी इस तरह की विधा में विश्वास रखते हैं?

जवाब- हां, शायरी में यह एक स्थापित परंपरा (रिवायत) है। इसे ‘सरी मिसरा’ कहते हैं। इसमें किसी मशहूर शायर की एक लाइन को लेकर उस पर अपनी शायरी पूरी की जाती है। यह हिंदी और उर्दू दोनों ही कविता में एक मान्य तरीका है। यह तरीका न तो गलत है और न ही सही, बल्कि यह एक कला है। इसके लिए भी गहरी जानकारी और समझ की जरूरत होती है ताकि दिए गए ‘मिसरे’ के बराबर का भाव लाया जा सके।

सवाल- सैयारा का टाइटल ट्रैक कैसे बना? क्या इसकी लाइन आपको अचानक से सूझी थी?

जवाब- यह गाना उस दौरान बना, जब फिल्म का टाइटल फाइनल हो रहा था। मोहित सूरी, जो हमेशा बहुत बेहतरीन म्यूजिकल फिल्में बनाते हैं, वे चाहते थे कि फिल्म का टाइटल ऐसा हो जो पूरी कहानी का निचोड़ कहे। सैयारा गाने की प्लेसिंग ऐसी थी कि यह पूरी फिल्म का सार बता रहा था। मोहित सर को लगा कि अगर यहां पर फिल्म का टाइटल लाया जाए तो सारी चीजें व्यवस्थित हो जाएंगी। मैंने उस सोच को कम्पोजिशन में लाने की कोशिश की, और इस तरह सैयारा का टाइटल सॉन्ग बन गया।

सवाल- अगर कोई गाना सोशल मीडिया पर वायरल होता है, तो क्या वह आज के समय का एक शक्तिशाली टूल है?

जवाब- मुझे लगता है कि सोशल मीडिया पर किसी चीज का वायरल होना थोड़े समय के लिए आपको पहचान दिला सकता है, फॉलोअर्स दिला सकता है, लेकिन उसकी स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) सिर्फ आपके टैलेंट पर निर्भर करती है। आज हर हफ्ते नए गाने आते रहते हैं, जिससे पुराने गाने थोड़ी देर में भुला दिए जाते हैं। लेकिन अगर आपका टैलेंट सच्चा है, तो वह लंबे समय तक बना रहेगा।

फिल्म सैयारा सबसे ज्यादा कमाई करने वाली न्यूकमर की फिल्म है।

फिल्म सैयारा सबसे ज्यादा कमाई करने वाली न्यूकमर की फिल्म है।

सवाल- क्या AI का इस्तेमाल करके गाने बनाना सही है?

जवाब- आज के दौर में कुछ ऐसे ऐप्स मौजूद हैं जो गाने के बोल या धुन बनाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि कोई ऐप सिर्फ एक विचार से पूरा गाना तैयार कर सकता है। संगीत और बोल में जो भावनाएं और गहराई होती है, वह एक इंसान ही ला सकता है। AI अभी भी उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया है जहां वह मानवीय भावनाओं को समझ कर वैसा ही संगीत तैयार कर सके।

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