नई दिल्ली/वॉशिंगटन19 मिनट पहले
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ट्रम्प ने 18 फरवरी को पहली बार दावा किया था भारत में वोटर टर्नआउट के लिए USAID 182 करोड़ रुपए दे रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का बड़ा झूठ सामने आया है। उन्होंने फरवरी में यह कहकर हड़कंप मचा दिया था कि अमेरिकी सहायता एजेंसी USAID (United States Agency for International Development) ने भारत की चुनावी प्रक्रिया में दखलंदाजी की है।
ट्रम्प ने दावा किया था कि USAID ने भारत में मतदान बढ़ाने के लिए 182 करोड़ रुपए दिए। इस पर अब अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें ऐसा कोई फंड न तो मिला और न उन्होंने किसी को दिया। दरअसल, ट्रम्प के बयान के बाद विदेश मंत्रालय ने दूतावास से 10 साल में भारत में अमेरिकी मदद का ब्योरा मांगा था।
2 जुलाई को दूतावास ने ब्योरा दिया, जिसमें 2014-2024 तक भारत में USAID फंडिंग का डेटा, उसके भागीदार, उद्देश्य शामिल हैं। दूतावास ने बताया कि इस दौरान कोई फंडिंग नहीं हुई। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को राज्यसभा में अमेरिकी दूतावास के साथ बातचीत की जानकारी दी।

ट्रम्प ने कहा था- भारत के पास बहुत पैसा, फंड क्यों दे रहे अमेरिकी सरकारी दक्षता विभाग (DOGE) ने 16 फरवरी 2025 में दुनियाभर में दूसरे देशों को USAID की 486 मिलियन डॉलर की फंडिंग रद्द करने की घोषणा की थी। DOGE ने कहा था कि इसमें भारत में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 182 करोड़ रुपए का फंड भी शामिल है।
इसके बाद ट्रम्प ने 18 फरवरी को कहा था, ‘भारत के पास बहुत ज्यादा पैसा है। भारत दुनिया के सबसे अधिक टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक हैं, खासतौर पर हमारे लिए। मैं भारत और उनके PM मोदी का सम्मान करता हूं, लेकिन 182 करोड़ क्यों?
ट्रम्प ने अगले कुछ दिनों तक फंडिंग के दावे को कई बार दोहराया भी। इस दौरान वे मोदी का नाम भी लेते रहे। ट्रम्प ने 21 फरवरी को कहा कि ये फंड भारत में वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए दिए गए और हमारा क्या? हमें भी अमेरिका में वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए पैसा चाहिए।

अमेरिका से 3 साल में तिब्बतियों की शिक्षा-विकास के लिए 255 करोड़ मिले विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दूतावास से मिले दस्तावेज बताते हैं कि 2021 से 2024 के बीच USAID के जरिए कुल 397 करोड़ रुपए भारत में दिए गए। यह मदद अमेरिका के साथ USAID को लेकर पहले से हुए 7 समझौतों के तहत दी गई। इसमें सबसे ज्यादा कुल 255 करोड़ रुपए तिब्बत फंड, तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा और अन्य कार्यक्रमों के लिए दिए गए।
भारत में पैसा किसे मिला | रकम (करोड़ रुपए) |
USAID से पैसा क्यों मिला? |
द तिब्बत फंड, दलाई लामा सेंट्रल तिब्बतन रिलीफ कमेटी, तिब्बतन चिल्ड्रन एजुकेशन एंड वेलफेयर, तिब्बती हेल्थ एसो आदि। | 255 | भारत और नेपाल के तिब्बती समुदाय के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक मजबूती के लिए। तिब्बती युवाओं के उत्थान, जीवनयापन को बेहतर बनाने, गरीब तिब्बती बच्चों की शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप आदि। |
केयर इंडिया सोल्यूशन | 26 | झारखंड, यूपी, बिहार, दिल्ली में गरीब बच्चों में लर्निंग स्किल्स बढ़ाने। |
पैलिडियम इंटरनेशनल | 26 | गरीब बच्चों, परिवारों में बचपन बेहतर बनाने। |
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन | 28 | सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने। |
रूम टू रीड | 18.27 | सरकारी स्कूलों में इनोवेटिक रीडिंग प्रोग्राम। |
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर | 16.97 | देश में वायु प्रदूषण कम करने व और इसके लिए एक उन्नत मॉडल बनाने। |
2 सितंबर से बंद हो जाएगा USAID बीते दिनों राज्यसभा में सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने सदन में पूछा था कि USAID की ताजा स्थिति क्या है? इस पर विदेश मंत्रालय ने बताया था कि USAID के 83% कार्यक्रम अमेरिकी प्रशासन ने समाप्त कर दिए हैं।
94% कर्मचारियों की छंटनी कर दी है। जो बचा 17% कार्यक्रम है, उसे मंत्रालय संभाल रहा है। फिर 29 जुलाई को अमेरिकी दूतावास ने बताया कि USAID के सभी कार्यक्रम 2 सितंबर से बंद हो जाएंगे।
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