Ganesh Chaturthi aaj Ganesh pujan aur visarjan ka mahatva | 10 दिनों का गणपति उत्सव आज से: गुणों को अपनाना ही गणेश पूजन है और अवगुणों का त्याग गणेश विसर्जन, बप्पा के रूप से सीखें 10 बातें

5 घंटे पहले

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आज गणेश चतुर्थी है। घर घर बप्पा विराजेंगे। 10 दिन बाद अनंत चतुर्दशी पर गणपति जी का विसर्जन किया जाएगा। गणेश जी के स्वरूप और प्रतीकों से हमें जीवन जीने की कला सीखने को मिलती है। उनके अनुसार, जीवन में गुणों का पूजन ही गणेश पूजन है और अवगुणों का त्याग ही गणेश विसर्जन है।

गणेश पूजन और विसर्जन पर वैदिक ज्योतिषी हेमंत कासट से समझते हैं गणेश जी के स्वरूप को…

विशालकाय शरीर और सूक्ष्म आंखें: इसका अर्थ है कि हर कार्य पर आपकी पैनी नजर होनी चाहिए और सिर्फ बाहरी दिखावे को त्याग देना चाहिए।

एक दांत: यह हमें सिखाता है कि जीवन में एक समय में एक ही लक्ष्य तय कर काम करें। बहुत सारे लक्ष्यों का त्याग करें।

सूप जैसे कान: इसका मतलब है कि सच्ची और अच्छी बातों को ही ग्रहण करें और बेकार की बातों को त्याग दें।

विशाल पेट: यह हमें सबकी बातों को सुनकर अपने पास रखने की प्रेरणा देता है और दूसरों की निंदा या चुगली करने की आदत को छोड़ने की सीख देता है।

लंबी सूंड: यह वासना का प्रतीक है, और हमें वासना का त्याग करना चाहिए।

हाथों में कमल और मोदक: कमल हमें कीचड़ में रहकर भी साफ रहने की सीख देता है और मोदक कहता है कि हर इंसान का मीठे शब्दों से स्वागत करें। कड़वे शब्द त्याग दें।

एक हाथ में वर मुद्रा: यह कहता है कि जो आपके पास आए, उसे आशीर्वाद दें और ईर्ष्या, द्वेष की भावना को त्याग दें।

एक हाथ में अंकुश: यह बताता है कि हमारा मन बहुत चंचल है, उसे अपनी आत्मा की बात सुनकर नियंत्रित करें और चंचलता का त्याग करें।

नमन मुद्रा में सिर: गणेश जी का सिर हमेशा झुका रहता है, जो हमें जीवन में विनम्र रहने और अहंकार का त्याग करने की प्रेरणा देता है।

वाहन चूहा: चूहा हमेशा कर्मशील रहता है, लेकिन कुतरने का काम करता है, इसलिए उसे इतना भारी बोझ उठाना पड़ता है। इसका मतलब है कि अगर आप कुतरने का काम (नुकसान पहुंचाने) करेंगे तो मुसीबत का सामना करना ही पड़ेगा। हमें जीवन में जोड़ने का काम करना चाहिए और कुतरने की प्रवृत्ति का त्याग करना चाहिए।

गणेश जी से मिलने वाले लाभ जब हम गणेश जी के स्वरूप से मिलने वाले गुणों को अपना लेते हैं, तो हमारे सभी काम बिना किसी बाधा के पूरे होने लगते हैं। इसका मतलब है कि हमें हर काम में सिद्धि प्राप्त होती है। जब आप किसी भी काम में सिद्ध हो जाते हैं, तो आपके पास धन (रिद्धि) की कभी कमी नहीं रहती।

जो व्यक्ति इन गुणों को अपनाता है, वह हमेशा शुभ काम करता है, और उसे सदा लाभ ही मिलता है। यही वजह है कि ऐसे व्यक्ति का समाज में विशेष सम्मान होता है और किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में सबसे पहले उन्हीं को आमंत्रित किया जाता है। ठीक इसी प्रकार, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से ही होती है।

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