छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क लगातार नए-नए रूप ले रहा है। महादेव एप की तर्ज पर अब रायपुर से एक और बड़ा सिंडिकेट खड़ा हो गया है, जिसका नाम FBBET77 है। महादेव से काम सीखकर सटोरियों ने अपना अलग साम्राज्य बना लिया है, जिसका रोजाना टर्नओवर करी
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FBBET77 का संचालन महादेव सट्टा एप से जुड़े रहे पुराने कर्मचारी कर रहे हैं। सिंडिकेट में नवीन, दिलीप और मोहसिन जैसे नाम सामने आए हैं, जिन्होंने मिलकर पूरा नेटवर्क खड़ा किया है। खास बात यह है कि सर्वर यूपी में रखा गया है और संचालन छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों से किया जा रहा है।
भास्कर रिपोर्टर ने खुद FBBET77 की एक आईडी खरीदी। पैनल में एंट्री करने के बाद सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड किया। यहां स्पोर्ट्स बुक, लॉटरी, एक्सचेंज, लाइव कैसीनो, स्लॉट और फैंटेसी गेम्स जैसे कई अलग-अलग सेक्शन मौजूद हैं। इनमें सैकड़ों खिलाड़ी 10 रुपए से लेकर हजारों का दांव लगाते हैं।
अब रिपोर्ट में विस्तार से पढ़िए रिपोर्टर को ID कैसे मिली, इसके लिए कितना खर्च करना पड़ा, पैनल की ID बनाने का क्या चार्ज है, किन नामी कारोबारियों का पैसा इसमें लगा है, और कैसे युवाओं को टारगेट कर इस नेटवर्क के जरिए उन्हें सट्टे की लत लगाई जा रही है?

अब जानिए FBBET77 सट्टेबाजी वेबसाइट्स की कैसे मिली जानकारी ?
दैनिक भास्कर के रिपोर्टर को सोर्स से पता चला कि महादेव सट्टा ऐप जैसे ही FBBET77 सट्टा संचालित हो रहा है, जिसमें रोजाना लाखों का दांव लग रहा है। वॉट्सऐप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल और इंस्टाग्राम में लुभावने प्रचार प्रसार किए जा रहे हैं। बोनस के लालच दिए जा रहे हैं।
इसके बाद भास्कर रिपोर्टर ने गूगल में FBBET77 सर्च किया। इस दौरान पता चला कि fbbet77.com नाम की वेबसाइट्स पर अलग-अलग सट्टा खिलाए जा रहे हैं। आईडी जनरेट करने के ऑनलाइन 100 रुपए लिए गए। इसके बाद पैनल में गेम खेलने की एंट्री मिली।

FBBET77 सट्टे की वेबसाइट पर अलग-अलग हेम हैं, जिनमें 24 घंटे दांव लगवाया जा रहा है।
खरीदी गई आईडी से पैनल में एंट्री
भास्कर टीम के सदस्य ने खरीदी गई आईडी से पैनल में एंट्री की और पूरी गतिविधि की रिकॉर्डिंग की। पैनल के अंदर 40 से अधिक गेम खेले जा रहे हैं। ऑनलाइन आईडी बनाने के साथ-साथ पैसों के लेन-देन में किसी तरह की गड़बड़ी होने पर समाधान के लिए अलग नंबर भी दिया गया है।
पैनल के भीतर कुछ मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए गए हैं। इन्हें शेयर करने पर FBBET77 की ओर से बोनस दिया जाता है। इसके अलावा 24×7 सपोर्ट के लिए वेबसाइट पर +91 99968 99940 नंबर दिया गया है, जिस पर कॉल करके जानकारी प्राप्त की जा सकती है। लेन-देन की प्रक्रिया को छुपाने के लिए सिंडिकेट किराए के बैंक खातों और डमी पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल कर रहा है।

ये अलग-अलग गेम हैं, जहां पैसे लगाकर गेम खेले जाते हैं।
महादेव सट्टा एप पैटर्न की कॉपी
इस पूरे नेटवर्क को महादेव ऐप के ब्लूप्रिंट पर तैयार किया गया है। ऑनलाइन ID, बोनस, सोशल मीडिया प्रमोशन और 24×7 जुआ – सबकुछ हूबहू। फर्क बस इतना है कि FBBET77 अभी तक अंडरग्राउंड था और बिना ज्यादा शोर-शराबे के काम कर रहा था। रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा समेत बस्तर तक नेटवर्क फैल चुका है।

इसमें गेम खेलने वालों को अलग-अलग रेट दिए गए हैं।
ऑनलाइन आईडी, बोनस और प्रमोशन
एप में रजिस्ट्रेशन कराने पर खिलाड़ियों को बोनस आईडी दी जाती है। सोशल मीडिया (WhatsApp ग्रुप, Telegram चैनल और Instagram पेज) पर “तुरंत पैसा कमाओ” का लालच देकर यूजर्स जोड़े जाते हैं। आईडी शेयर करने और नए लोगों को जोड़ने पर भी बोनस दिया जा रहा है।
सिंडिकेट के पास कहां से आया पैसा ?
ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट ने नेटवर्क खड़ा करने के लिए पुराने कारोबारियों की मदद ली। बताया जा रहा कि ऑनलाइन सट्टे में सराफा कारोबारियों और पेट्रोल पंप संचालकों का पैसा इन्वेस्ट किया गया है। इनमें से कुछ लोगों का नाम महादेव सट्टा एप केस में पहले ही आ चुका है।

इस तरह के अलग-अलग विज्ञापन भी चलाए जा रहे हैं।
कानूनी एंगल और पुलिस की जांच
छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर सेल ने इस नेटवर्क की गोपनीय जांच शुरू की है। इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट और प्रिवेंशन ऑफ गैंबलिंग लॉ के तहत केस दर्ज हो सकता है। आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई संभव है। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे इस सिंडिकेट से जुड़े कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

गेम खेलने से पहले पेमेंट करने का नोटिफिकेशन आता है, जिसमें QR कोड और एक मोबाइल नंबर होता है।
अब जानिए कब बंद हो सकते हैं ये ऑनलाइन गेम ?
आने वाले दिनों में फैंटेसी स्पोर्ट्स जैसे ड्रीम-11, रमी, पोकर वगैरह सब बंद हो सकते हैं। 20 अगस्त को लोकसभा में प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल 2025 पास हो गया है।
ये बिल ऑनलाइन गेमिंग को रेगुलेट करने और रियल-मनी गेम्स पर रोक लगाने के लिए है। चाहे ये गेम्स स्किल बेस्ड हों या चांस बेस्ड दोनों पर रोक लगेगी।
इस बिल में क्या-क्या नियम हैं?
जवाब: बिल में कई सख्त नियम:
- रियल-मनी गेम्स पर रोक: कोई भी मनी बेस्ड गेम ऑफर करना, चलाना, प्रचार करना गैरकानूनी होगा। ऑनलाइन गेम खेलने वालों को कोई सजा नहीं होगी।
- सजा और जुर्माना: अगर कोई रियल-मनी गेम ऑफर करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। विज्ञापन चलाने वालों को 2 साल की जेल और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
- रेगुलेटरी अथॉरिटी: एक खास अथॉरिटी बनाई जाएगी, जो गेमिंग इंडस्ट्री को रेगुलेट करेगी, गेम्स को रजिस्टर करेगी और ये तय करेगी कि कौन सा गेम रियल-मनी गेम है।
- ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा: पबजी और फ्री फायर जैसे ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को सपोर्ट किया जाएगा। ये गेम्स बिना पैसे वाले होते हैं इसलिए इन्हें बढ़ावा मिलेगा।

सवाल 2: मनी बेस्ड गेम्स पर पूरी तरह से बैन क्यों लाया जा रहा है?
जवाब: सरकार का कहना है कि मनी बेस्ड ऑनलाइन गेमिंग की वजह से लोगों को मानसिक और आर्थिक नुकसान हो रहा है। कुछ लोग गेमिंग की लत में इतना डूब गए कि अपनी जिंदगी की बचत तक हार गए और कुछ मामलों में तो आत्महत्या की खबरें भी सामने आईं।
इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग और नेशनल सिक्योरिटी को लेकर भी चिंताएं हैं। सरकार इसे रोकने के लिए सख्त कदम उठाना चाहती है।