मेरे पास खेती के लिए 5.5 एकड़ जमीन है। जिसे मैंने तीन हिस्सों में बांटा है। आधा एकड़ जमीन में नर्सरी बनाई। जिसमें महोगनी, सागवान, शीशम, गगनश्री, गम्हार जैसे कीमती लकड़ी के पौधों के अलावा काजू, जामुन, आम, बकेन, गुलमोहर, चतनी आदि का 20 हजार पौधे हैं।
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चक्रधरपुर के किसान रमेश इमारती लकड़ी लगा कर रहे कमाई।
लिफ्ट एरिगेशन सिस्टम से करते हैं खेती
एक एकड़ जमीन में सब्जी का खेती करता हूं। उसमें लौकी, मटर, बैंगन, करेला, मिर्च और तरबूज लगाता हूं। इनकी खेती लिफ्ट एरिगेशन सिस्टम से करता हूं। इसके अलावा बची 4 एकड़ जमीन में आम का बागान लगाया। पिछले आठ सालों में कृषि क्षेत्रों से जुड़ा हूं। अब मैं किसानों को खेती के साथ नर्सरी को लेकर भी प्रेरित कर रहा हूं।
किसानों को भविष्य के लिए कीमती लकड़ी वाले पौधे उपलब्ध कराता हूं। ताकि बगान में किनारे-किनारे पौधों को लगाएं और उसे तैयार करें। उससे उन्हें भविष्य में अच्छी आमदनी मिलेगी। एक तरह से उन्हें पैसों का पेड़ लगवाता हूं,ताकि 12-15 साल बाद उन्हें फायदा मिले। क्योंकि यही उनकी भविष्य निधि है।

रमेश इमारती लकड़ी को भविष्य निधि बताते हैं।
रमेश की प्रेरणा से कई किसान लगा रहे आम बगान
आम बागबानी से प्रेरित होकर पंचायत के करीबन 15-20 किसानों ने बागबानी में हाथ आजमाया है। पुसालोटा गांव निवासी किसान रांदो बोयपाई ने आम बागवानी और नर्सरी शुरू की। छह हजार पौधों की नर्सरी और आम बागबानी से अच्छी आमदनी वे प्राप्त कर रहे।
इसी तरह बाईपी गांव निवासी जोन कायम ने दो एकड़ जमीन पर बागबानी शुरू की। निश्चय ही आने वालेसमय में उसका लाभ उन्हें मिलेगा। उनकी आमदनी बढ़ेगी। आम बागबानी को सिर्फ पदाधिकारी ही नहीं किसान भी देखने पहुंचते हैं।
आम बागबानी का गुजरात से लिया प्रशिक्षण
मैंने आम बागवानी के लिए गुजरात से प्रशिक्षण लिया है। जिससे मुझे बागबानी में फायदा हुआ। जबकि खेती बाड़ी को लेकर उद्यान विभाग रांची और आत्मा से प्रशिक्षण लेते रहता हूं। वहीं आत्मा से किसान मित्र भी हूं। चाईबासा और मनोहरपुर के किसान हमसे बराबर संपर्क में रहते हैं बागवानी से जुड़े टिप्स लेते हैं।

रमेश कोड़ा नर्सरी और आम बागवानी के लिए जाने जाते हैं।
जानिए… कौन हैं रमेश कोड़ा
चक्रधरपुर प्रखंड, सिलफोड़ी पंचायत के पुसालोटा गांव निवासी रमेश कोड़ा नर्सरी और आम बागवानी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन किया है। पत्नी पार्वती पुरती मैट्रिक तक पढ़ाई की है। वह भी खेती बाड़ी में पति का सहयोग करती हैं।
रमेश कोड़ा की 13 वर्षीय बेटी हरि क्यूरी कोड़ा छात्रावास में रहकर पढ़ाई करती हैं। एक बेटा 3 वर्षीय नील एंड्रीक कोड़ा है। बेटी छुट्टी में घर लौटने पर खेती-बाड़ी में हाथ बंटाती है। जब भी अधिकारी का विजिट के लिए आते हैं उनकी नर्सरी अवश्य जाते हैं।