स्पोर्ट्स डेस्क26 मिनट पहले
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जनवरी 1960। भारत को आजाद हुए 13 साल से ज्यादा हो गए थे। भारत विभाजन से अस्तित्व में आने वाला मुल्क पाकिस्तान हर मामले में प्रतिस्पर्धा की कोशिश में लगा था। विज्ञान, टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत आगे निकल रहा था लेकिन खेल खासकर क्रिकेट और हॉकी में पाकिस्तान की टीम बेहतर रिजल्ट हासिल करने लगी थी।
पाकिस्तान ने आजादी के बाद से 1960 की शुरुआत तक 29 टेस्ट मैच खेले और इसमें से 8 में जीत हासिल कर ली। 9 में उसे हार मिली थी। दूसरी ओर भारतीय टीम ने इसी टाइम पीरियड में 54 टेस्ट मैच खेले और सिर्फ 6 में जीत हासिल कर पाई। 22 में हार झेलनी पड़ी।
इस कमजोर प्रदर्शन से परेशान BCCI ने अपने मेंबर्स की मीटिंग बुलाकर इसका कारण समझने की कोशिश की। ज्यादातर सदस्यों की राय थी कि रणजी ट्रॉफी से टेस्ट क्रिकेट के लायक टैलेंट नहीं मिल रहे हैं। रणजी ट्रॉफी 1934 से हो रही थी लेकिन इसके कई मुकाबले एकतरफा होते थे। एक तरफ मजबूत टीम होती थी और दूसरी तरफ अक्सर कोई कमजोर टीम।
फैसला किया गया कि देश में नया डोमेस्टिक टूर्नामेंट शुरू किया जाएगा। इसमें खेलने वाली सभी टीमें टक्कर की होंगी और कड़े मुकाबलों से बेहतरीन क्रिकेटर सामने आएंगे। तय हुआ कि इसमें राज्यों की टीमें आपस में नहीं भिड़ेंगी। मुकाबला जोनल बेसिस पर होगा। देश के नॉर्थ जोन में जितने राज्य आते हैं उनको मिलाकर एक टीम। इसी तरह साउथ, ईस्ट, वेस्ट और सेंट्रल जोन की टीमें बनाई गई। इनके बीच 1961 में पहला टूर्नामेंट खेला गया। इसे नाम दिया गया दलीप ट्रॉफी।
जिस तरह रणजी ट्रॉफी का नाम इंग्लैंड के लिए टेस्ट खेल चुके नवानगर के जाम साबिह रणजीत सिंह जी उर्फ रणजी के नाम पर रखा गया था। उसी तरह नए जोनल टूर्नामेंट का नाम रणजी के भतीजे और इंग्लैंड के लिए खेल चुके दलीप सिंह जी के नाम पर रखा गया।

विदेशी टीमें और विदेशी खिलाड़ी भी दलीप ट्रॉफी खेल चुके
IPL भारत का पहला ऐसा टूर्नामेंट नहीं है जिसमें विदेशी खिलाड़ी खेलते हैं। यह तमगा दलीप ट्रॉफी को हासिल है। मुकाबलों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए दलीप ट्रॉफी के दूसरे सीजन में विदेशी खिलाड़ियों को भी शामिल किया गया।
1962 में पांच में से चार टीमों ने वेस्टइंडीज के एक-एक खिलाड़ी को टीम में शामिल किया। तब वेस्टइंडीज के मशहूर तेज गेंदबाज रॉय गिलक्रिस्ट साउथ जोन की तरफ से खेले। फाइनल में गिलक्रिस्ट ने 3 विकेट लेकर टीम को चैंपियन भी बनाया। इसके बाद 4 दशक तक इसमें विदेशी खिलाड़ियों को मौका नहीं दिया गया।
2004 से अगले कुछ सालों तक टूर्नामेंट में एक विदेशी टीम को शामिल किया जाने लगा। 2004 में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड इलेवन ने टूर्नामेंट में भाग लिया। बांग्लादेश के पूर्व कप्तान मोहम्मद अशरफुल भी इस टीम में मौजूद थे। 2005 में जिम्बाब्वे प्रेसिडेंट इलेवन दलीप ट्रॉफी खेलने आई। हैमिल्टन मसाकाद्जा की कप्तानी में टीम अपने दोनों लीग मैच हारकर बाहर हो गई।
2006 और 2007 में श्रीलंका और इंग्लैंड की ए टीम को दलीप ट्रॉफी खेलने का मौका मिला। श्रीलंका के पूर्व लेफ्ट आर्म स्पिनर रंगना हैराथ, इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज केविन पीटरसन, इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज और इस समय अफगानिस्तान के कोच जोनथन ट्रॉट ने टूर्नामेंट में हिस्सा लिया।

दलीप ट्रॉफी की बादशाहत वेस्ट जोन के पास
मुंबई शुरुआत से भारतीय क्रिकेट का सेंटर रहा है। मुंबई वेस्ट जोन में आता है लिहाजा दलीप ट्रॉफी में वेस्ट की टीम को इसका काफी फायदा भी हुआ। सबसे ज्यादा 19 बार वेस्ट जोन ने ही खिताब जीता है। टीम ने शुरूआती चारों सीजन अपने नाम किए थे। नॉर्थ जोन 18 बार इस ट्रॉफी को जीत चुकी हैं।

सबसे ज्यादा रन वसीम जाफर के नाम
टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा रन वेस्ट जोन के ही वसीम जाफर के नाम है। जाफर ने इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा 2545 रन बनाए। उन्होंने 1999 फाइनल में कोलकाता के ईडन गार्डन्स में नॉर्थ जोन के खिलाफ नाबाद 173 रनों की पारी खेली थी। टूर्नामेंट से जुड़े अन्य बड़े रिकॉर्ड आप अगले ग्राफिक्स में देख सकते हैं।

2025 का नया चैंपियन कौन बनेगा?
इस बार भी टूर्नामेंट जोनल ट्रॉफी में खेला जाएगा। टूर्नामेंट 28 अगस्त से शुरू होकर 11 सितंबर तक चलेगा।
