मुंबई3 घंटे पहले
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2024 में बायजूस की वैल्यूएशन शून्य हो गई थी। कानूनी लड़ाइयां, कर्ज का पहाड़ और संचालन में अस्थिरता ने इसे डुबो दिया। बायजू रवींद्रन ने इसे 2011 में शुरू किया था।
कर्ज में डूबी एडटेक कंपनी बायजूस के फाउंडर बायजू रवींद्रन ने कहा है कि वे जल्द ही कंपनी को रिलॉन्च करेंगे। रवींद्रन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में अपनी पुरानी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘टूटे थे, टूटे नहीं हैं। हम फिर से उठेंगे। मुझे अपने छात्रों की आंखों की चमक याद है।’
एक समय बायजूस देश का सबसे बड़ा एडटेक स्टार्टअप था। 2022 तक इसकी वैल्यू 22 बिलियन डॉलर यानी, करीब 1.88 लाख करोड़ रुपए थी, लेकिन फाइनेंशियल मिस मैनेजमेंट और अन्य समस्याओं के कारण 2024 में कंपनी की नेटवर्थ जीरो हो गई।
2011 में बायजू रवींद्रन ने बायजूस की शुरुआत एक छोटे ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म के रूप में की थी। X पर उन्होंने ये तस्वीर शेयर की है।
बायजू ने 3 बड़ी बातें कहीं…
- एक बार फिर जब हम अपनी कंपनी को रिलॉन्च करेंगे, जो मुझे लगता है कि उम्मीद से पहले ही हो जाएगा – तो विशेष रूप से हम अपने पुराने लोगों को हायर करेंगे। मेरा अति-आशावादी होना कुछ लोगों को पागलपन लग सकता है, लेकिन यह मत भूलिए कि नंबर एक बनने के लिए आपको अलग और अजीब होना पड़ता है।
- कुछ भी उतना अच्छा नहीं होता जितना लगता है, न ही उतना बुरा जितना आपको विश्वास दिलाया जाता है। सच्चाई आमतौर पर कहीं बीच में होती है। इसलिए मैं पिछले 20 सालों के बारे में बात करने आया हूं- अच्छे 17, बुरे 2 और बदसूरत 1, कोई फिल्टर नहीं, केवल तथ्य।
- 9 साल में हमने 2.15 लाख ग्रेजुएट्स को हायर किया। एक्सपीरियंस और एकेडमिक बैकग्राउंड के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी को मिनिमम 6 लाख रुपए सैलरी दी। इन युवाओं को उनके करियर का पहला मौका देना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।
मिस-मैनेजमेंट ने बायजूस को डुबोया
चढ़ने की कहानी
2011 में रवींद्रन ने बायजूस की शुरुआत एक छोटे एजुकेशन प्लेटफॉर्म के रूप में की। यह कोचिंग क्लासेस से शुरू हुआ, लेकिन 2015 में ऐप लॉन्च के साथ यह तेजी से बढ़ा। बच्चों के लिए इंटरैक्टिव लर्निंग, आसान भाषा और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इसकी खासियत बनी।
2020-21 में कोविड महामारी ने ऑनलाइन एजुकेशन की डिमांड बढ़ा दी और बायजूस ने इसका पूरा फायदा उठाया। आक्रामक मार्केटिंग (शाहरुख खान जैसे ब्रांड एम्बेसडर) और अधिग्रहण (व्हाइटहैट जूनियर, आकाश जैसी कंपनियां) ने इसे 2022 तक $22 बिलियन की वैल्यूएशन तक पहुंचा दिया, जिससे यह भारत का सबसे मूल्यवान स्टार्टअप बन गया।
गिरावट की शुरुआत
2022 के बाद बायजूस की चमक फीकी पड़ने लगी। आक्रामक विस्तार और अधिग्रहण के लिए लिया गया भारी कर्ज कंपनी पर बोझ बन गया। फाइनेंशियल रिपोर्ट्स में देरी हुई और 2021-22 में ₹8,245 करोड़ का घाटा सामने आया। निवेशकों ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए। कंपनी पर आक्रामक सेल्स टैक्टिक्स और रिफंड न देने के आरोप लगे, जिससे ग्राहकों का भरोसा टूटा।
ढलान की ओर
2023 तक हालात बिगड़ गए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने FEMA उल्लंघन की जांच शुरू की। बोर्ड मेंबर और ऑडिटर डेलॉइट ने इस्तीफा दे दिया। अमेरिकी कर्जदाताओं ने दिवालियापन की मांग की। कर्मचारी निकाले गए। बायजूस की वैल्यूएशन तेजी से गिरी।
अंत की ओर
2024 तक बायजूस की वैल्यूएशन शून्य हो गई। कानूनी लड़ाइयां, कर्ज का पहाड़ और संचालन में अस्थिरता ने इसे डुबो दिया। अभी इस पर दिवालियेपन की कार्रवाई चल रही है।
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