लोगों को डर है कि अतिक्रमण की कार्रवाई रात को ही होगी। इसीलिए रात को मंदिर के बाहर लोग पहरा दे रहे हैं।
आमतौर पर भगवान अपने भक्तों की रक्षा करते हैं, लेकिन गुजरात के गिर-सोमनाथ में एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई है। यहां भक्तों को भगवान के मंदिर की रक्षा के लिए रात भर जागकर पहरा देना पड़ रहा है। दरअसल, सोमनाथ मंदिर के कॉरिडोर के लिए इस मंदिर को गिराया
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184 साल पहले नवाब रसूल खान ने भेंट में दिया था सोमपुरा ब्राह्मण समाज 184 वर्षों से मंदिर का स्वामित्व, भोग और सेवा-पूजा का कार्य करता आ रहा है। नवाब रसूल खानजी के समय में यह मंदिर वासुदेव ब्रह्मचारी महाराज को सौंपा गया था। इसका लिखित दस्तावेज भी है। 5 अगस्त को वेरावल के डिप्टी कलेक्टर की एक टीम मंदिर आई और इसका डिमोलिशन करने के लिए मार्किंग भी करके चली गई है।

मंदिर के बाहर पहरा देते हुए लोग।
आधी रात को ही होगी कार्रवाई सोमवार रात 12 बजे दिव्य भास्कर की टीम इस पर ग्राउंड रिपोर्ट के लिए मौके पर पहुंची। यहां सोमपुरा तीर्थ पुरोहित ब्रह्म समाज के युवा और श्रद्धालु मंदिर पर पहरा दे रहे थे। क्योंकि उन्हें मंदिर तोड़े जाने का डर सता रहा है। स्थानीय लोगों में इस बात का डर है कि प्रशासन रात में इस मंदिर को तोड़ देगा।
डिमॉलिशन टीम ने मंदिर के बाहर निशान लगाए मंदिर के पुजारी हर्ष आचार्य ने दिव्य भास्कर को बताया कि 5 अगस्त को वेरावल डिप्टी कलेक्टर की टीम मंदिर आई और तोड़फोड़ के लिए जगह चिह्नित की और कहा कि इसी जगह पर तोड़फोड़ की जानी है।
उन्होंने पुजारी से अपना सामान संभाल कर रखने को कहा और यह भी चेतावनी दी कि बुलडोजर कभी भी आ सकता है। इस घटना से सोमपुरा ब्रह्मो समाज में रोष फैल गया है।

डिप्टी कलेक्टर ने मंदिर के बाहर मार्किंग करवाई।
डिप्टी कलेक्टर जूते पहनकर ही मंदिर में घुस गए थे: पुजारी पुजारी हर्ष आचार्य ने आगे कहा कि डिप्टी कलेक्टर द्वारा सोमनाथ मंदिर कॉरिडोर और इस मंदिर को भी ध्वस्त करने की चर्चा को लेकर नगरवासियों में एक अनजाना डर है। 5 अगस्त 2025 को डिप्टी कलेक्टर विनोद जोशी राजस्व टीम के साथ मंदिर आए और जूते-चप्पल पहनकर मंदिर में घुस गए। मैंने जब उन्हें रोका तो उन्होंने कहा कि यह मंदिर नहीं, मकान है और इस पर कभी भी बुलडोजर चल जाएगा।

नवाब रसूल खान ने यह मंदिर वासुदेव ब्रह्मचारी महाराज को सौंपा था। इसका लिखित दस्तावेज।
सदियों पुराना है यह मंदिर सोमपुरा ब्रह्म समाज के उपाध्यक्ष जयवर्धन जानी ने बताया कि यह मंदिर सदियों पुराना है। दुखहरण महाराज राधारमण देव के बाल रूप हैं। राधारमण देव की यह हवेली दो मंजिला है, जिसमें दूसरी मंजिल पर ठाकोरजी सदैव विराजमान रहते हैं।
भगवान श्री राधारमण देव वर्ष में केवल तीन बार ही अपने सिंहासन पर विराजमान होकर ग्रामीणों को दर्शन देने इस मंदिर में आते हैं। ये दिन हैं शरद पूर्णिमा, गुजराती नववर्ष और होली उत्सव यानी फाल्गुन सुद पूर्णिमा। प्रभास पाटन नगर के समस्त लोगों की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है।

सोमनाथ मंदिर के प्रस्तावित कॉरिडोर की कंप्यूटर डिजाइन।
बनाया जा रहा है सोमनाथ कॉरिडोर सोमनाथ मंदिर के विकास के लिए कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इसके लिए मंदिर के आसपास की 384 संपत्तियों के अधिग्रहण की कार्रवाई की जा चुकी है। जिसका स्थानीय लोगों में विरोध हो रहा है।