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6 घंटे पहले
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अभी गणेश उत्सव चल रहा है और सुबह-शाम पूजा में दूर्वा खासतौर पर चढ़ानी चाहिए, लेकिन ध्यान रखें गणपति पूजा में तुलसी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। विष्णु जी और उनके अवतारों की पूजा तुलसी के बिना अधूरी ही मानी जाती है, लेकिन शिव जी और भगवान गणेश को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है। जानिए इन दोनों देवताओं को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते हैं…
तुलसी ने गणेश जी को दिया था शाप
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पौराणिक कथा है कि तुलसी गणेश जी से विवाह करना चाहती थी। तुलसी ने गणपति से विवाह करने की प्रार्थना की, लेकिन गणेश जी ने विवाह करने से मना कर दिया, क्योंकि वे ब्रह्मचारी रहना चाहते थे। गणेश जी के मना करने से तुलसी क्रोधित हो गई।
क्रोध में तुलसी ने गणेश जी को दो विवाह होने का शाप दे दिया। इस शाप की वजह से गणेश जी भी क्रोधित हो गए और उन्होंने भी तुलसी को शाप देते हुए कहा कि तुम्हारा विवाह एक असुर से होगा।
असुर से विवाह होने का शाप सुनकर तुलसी दुखी हो गई, उसने गणेश जी से अपने व्यवहार के लिए क्षमा मांगी। तब गणेश जी ने कहा कि तुम्हारा विवाह शंखचूर्ण नाम के असुर से होगा, लेकिन तुम भगवान विष्णु को प्रिय रहोगी, तुम्हारी पूजा भी होगी, तुम्हारे बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाएगी, लेकिन मेरी पूजा में तुलसी वर्जित रहेगी। इस शाप की वजह से गणेश जी की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
शिव जी ने किया था तुलसी के पति शंखचूड़ का वध
शंखचूड़ एक असुर था। उसका विवाह तुलसी के साथ हुआ था। शंखचूड़ को वरदान प्राप्त था कि जब तक उसकी पत्नी तुलसी का पतिव्रता धर्म खंडित नहीं होगा, तब तक उसे कोई मार नहीं सकता। वरदान मिलने से शंखचूड़ बहुत शक्तिशाली हो गया, उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। इसके बाद सभी देवता भगवान शिव की शरण में गए। इसके बाद शिव जी और भगवान विष्णु ने योजना बनाई और विष्णु जी ने तुलसी का पतिव्रता धर्म भंग किया। जिससे शंखचूड़ का सुरक्षा कवच खत्म हो गया। इसके बाद भगवान शिव ने शंखचूड़ का वध कर दिया।
जब तुलसी को ये मालूम हुआ कि उसका पतिव्रता धर्म भंग हुआ है, तब उसने भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का शाप दिया। विष्णु जी ने तुलसी का ये शाप स्वीकार किया। शालिग्राम विष्णु जी का वही पत्थर स्वरूप है और विष्णु जी ने तुलसी पौधे का रूप दे दिया और ये पौधा विष्णु जी को बहुत प्रिय हो गया। तभी से तुलसी के साथ शालिग्राम पूजन की परंपरा चली। शिव जी ने तुलसी के पति शंखचूड़ का वध किया था, इस कारण तुलसी ने खुद को शिव पूजा के लिए वर्जित किया था।