बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर किए जा रहे अत्याचार के विरोध में निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति द्वारा आयोजित परलकोट महाबंद का व्यापक असर रहा। पखांजूर, कापसी, बांदे के साथ ग्रामीण अंचल में दुकानें पूरी तरह बंद रही।
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देश में जहां जहां बांग्लादेश से विस्थापितों को बसाया गया, वहां एेसी ही सभा होगी। आंदोलन का समापन देश की राजधानी दिल्ली में बड़ी सभा के साथ होगा। आंदोलन को भाजपा तथा कांग्रेस दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों ने समर्थन दिया। पखांजूर, कापसी, बांदे के साथ ग्रामीण अंचल में दुकानें सुबह से स्वस्फूर्त बंद रहीं।
परलकोट क्षेत्र के गांव-गांव में लगने वाले साप्ताहिक बाजार भी आज बंद रहे। बसें टैक्सी सामान्य दिनों की तरह ही चलती रहीं। बंद का असर इतना व्यापक था कि सभी निजी स्कूल बंद रहे जबकि शासकीय स्कूलों में छात्र पहुंचे ही नहीं जिसके चलते स्कूलें खाली रहे। बंग समाज के सरकारी कर्मचारियों ने आज अवकाश लेकर आंदोलन में हिस्सा लिया।
हर परिवार से एक अनिवार्य रूप से पहुंचा
गुरूवार को हुए आंदोलन में परलकोट क्षेत्र में निवासरत बंग समुदाय के प्रत्येक परिवार से एक व्यक्ति ने अनिवार्य रूप से भाग लिया। आंदोलन में भाग लेने पहुंचे बंगबंधुओं ने कहा पाकिस्तान-बांग्लादेश विभाजन के दौरान हमारे पूर्वजों ने भी इस्लामिक कट्टरपंथियों का अत्याचार झेला था। आज वही परेशानी बांग्लादेश में रह रहे वहां के अल्पसंख्यक हिंदू झेल रहे हैं जिनकी मदद के लिए भारत सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
महाराष्ट्र से शुरू हुआ, ये दूसरी बड़ी सभा
निखिल भारत समन्वय समिति प्रदेश अध्यक्ष सुबोध विश्वास ने बताया आंदोलन महाराष्ट्र से शुरू हुआ। दूसरी सभा परलकोट में हो रही है। यह पूरे भारत में उन जगहों पर होगा जहां बांग्लादेश से विस्थापित हिन्दू भारत में निवासरत हैं। बंग समाज का यह क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा आंदोलन था। इससे पहले अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल कर आरक्षण देने की मांग को लेकर 2016 में बंग समाज ने बड़ा आंदोलन किया था।
बांग्लादेश नहीं पूरे विश्व में समस्या: सांसद भोजराज नाग ने कहा हिन्दुओं को स्वयं को बचाना है तो सभी को वर्ग समुदाय भूलकर एक होना होगा। आज बांग्लादेश में जो हो रहा है वह केवल बांग्लादेश नहीं पूरे विश्व की समस्या है। जहां भी इस्लामिक संख्या बढ़ती है वहां अन्य धर्म समाज के लोगों पर इसी प्रकार अत्याचार शुरू हो जाते हैं। समाज को सजग रहने की जरूरत है।