Arvind Kejriwal Promises Fraud; Mahila Samman Yojana | Delhi Election 2025 | आज का एक्सप्लेनर: केजरीवाल का महिलाओं को ₹2100 देने का वादा, अफसरों ने अखबारों में छपवाया- ये फ्रॉड; वो सब कुछ जो जानना जरूरी है

दिल्ली में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अरविंद केजरीवाल ने महिलाओं के लिए 2100 रुपए महीने और बुजुर्गों के मुफ्त इलाज वाली स्कीम्स का वादा किया। 23 दिसंबर से इसके लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिए गए, लेकिन 25 दिसंबर को दिल्ली सरकार के ही दो विभागों के अफस

.

क्या है पूरा विवाद, इसका चुनावी इम्पैक्ट क्या होगा और दिल्ली के अधिकारी अपने ही सीएम-मंत्रियों की नाफरमानी की हिम्मत कहां से लाते हैं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल 1: केजरीवाल ने दिल्ली की जनता के लिए क्या-क्या ऐलान किए थे? जवाबः बीते 34 दिनों में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के लोगों के लिए 4 बड़ी योजनाओं का ऐलान किया…

सवाल 2: उनकी सरकार के अफसरों ने इसे नकारते हुए क्या विज्ञापन छपवाया? जवाबः 25 दिसंबर को दिल्ली सरकार के महिला और बाल विकास विभाग के जॉइंट डायरेक्टर की ओर से अखबार में विज्ञापन दिया गया। इसमें कहा गया, ‘एक राजनीतिक पार्टी दिल्ली की महिलाओं को मुख्यमंत्री महिला योजना के तहत 2,100 रुपए प्रति माह देने का दावा कर रही है। यह स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली सरकार द्वारा ऐसी कोई योजना अधिसूचित नहीं की गई है।’

विज्ञापन में आगे लिखा,

QuoteImage

दिल्ली की जनता को सलाह दी जाती है कि वे ऐसी गैर-मौजूद योजना के वादों पर विश्वास न करें, क्योंकि ये भ्रामक और बिना किसी अधिकार के हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग ऐसी किसी भी देनदारी या धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार नहीं होगा।

QuoteImage

दिल्ली के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के विशेष सचिव की ओर से एक अन्य विज्ञापन जारी किया गया। इसमें संजीवनी योजना को फ्रॉड बताया। इसमें कहा, ‘आज तक ऐसी कोई भी कथित संजीवनी योजना अस्तित्व में नहीं है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग ने न तो किसी स्वास्थ्य अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति को बुजुर्ग नागरिकों से ऐसी व्यक्तिगत जानकारी और डेटा एकत्र करने के लिए अधिकृत किया है, न ही विभाग इस संबंध में कोई कार्ड प्रदान करता है।’

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने दिल्ली की जनता को 3 सलाह दीं…

  • कथित गैर-मौजूद संजीवनी योजना के तहत मुफ्त इलाज के किसी भी वादे पर विश्वास न करें।
  • योजना के तहत फायदा देने का दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई व्यक्तिगत जानकारी न दें।
  • अनजाने में किसी भी दस्तावेज पर अपना हस्ताक्षर या अंगूठा न लगाएं।

सवाल 3: क्या इस विज्ञापन से योजनाओं के इम्प्लिमेंटेशन पर क्या कोई असर पड़ेगा? जवाबः इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी बताते हैं कि यह दोनों फिलहाल सिर्फ चुनावी वादें हैं, स्कीम्स नहीं। संजीवनी योजना और महिला सम्मान योजना को जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया है, क्योंकि आप सरकार के पास समय नहीं बचा है। मुख्यमंत्री आतिशी को इन स्कीम के वादों को पूरा करने के लिए प्रोसेस फॉलो करना पड़ेगा, जिसमें लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) की परमिशन की जरूरत होगी।

संजीवनी स्कीम के ऐलान के दौरान अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया।

संजीवनी स्कीम के ऐलान के दौरान अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया।

फरवरी 2025 में दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में दिल्ली सरकार के पास स्कीम्स को लॉन्च करने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचा है। इन सबके बीच विभागों के दोनों विज्ञापनों ने मामला और ज्यादा बिगाड़ दिया है।

द फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2024 की शुरुआत में दिल्ली सरकार की ओर से टैक्स न देने वाली महिलाओं को 1 हजार रुपए देने की योजना को मंजूरी मिल गई थी, लेकिन इस योजना के लिए अभी तक ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन पोर्टल शुरू नहीं हुआ है।

महिलाओं को 1 हजार रुपए देने की घोषणा बजट में की गई थी और इसे मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दे दी थी, लेकिन 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को मुफ्त इलाज की घोषणा पर कोई काम नहीं हुआ है, क्योंकि कैबिनेट ने इसे पारित नहीं किया है। दिल्ली में योजनाओं को लेकर चुनी हुई सरकार और ब्यूरोक्रेसी के बीच चल रहे घमासान से इन योजनाओं को लागू करने में परेशानी हो सकती है।

भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने केजरीवाल पर हमला करते हुए उन्हें बड़ा धोखेबाज बताया। सिरसा ने कहा,

QuoteImage

इन फॉर्म के जरिए दिल्ली सरकार अवैध रूप से डेटा इकट्ठा करने की कोशिश कर रही है।

QuoteImage

सवाल 4: क्या इस कॉन्ट्रोवर्सी का कोई चुनावी असर पड़ेगा? जवाबः अमिताभ तिवारी कहते हैं कि इस कॉन्ट्रोवर्सी के बावजूद दिल्ली में आप को हराना भाजपा के लिए मुश्किल है, क्योंकि भाजपा के सबसे सुस्त नेता दिल्ली के प्रदेश कार्यालय में बैठते हैं। वो सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के भरोसे बैठे रहते हैं। आम आदमी पार्टी को हराने के लिए भाजपा को केजरीवाल की टक्कर का एक नेता उतारना होगा, जो दिल्ली में CM का फेस होगा।

अमिताभ तिवारी बताते हैं कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव में 30% फ्लोटिंग वोटर्स आम आदमी पार्टी को वोट करते हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव में यह वोटर्स 15% भाजपा के पास और 15% वोटर्स कांग्रेस के पास चले जाते हैं। अब आप को उम्मीद है कि वोटर्स उनके पास वापस आ जाएंगे, लेकिन इसके पीछे भी आप की बिल्कुल अलग राजनीति चली आ रही है।

2020 के विधानसभा चुनाव में वोटर्स के पास वापस लौटने के लिए स्कूल डेवलपमेंट, फ्री बिजली और फ्री पानी जैसी स्कीम मौजूद थीं, लेकिन 2025 के चुनाव में महिलाओं के लिए फ्री बस सर्विस इकलौती नई स्कीम रही। इसलिए आप सरकार ने 4 नई स्कीम्स का वादा किया। जिससे वोटर्स को इस बार चुनाव में कुछ नया पेश किया जाए, लेकिन इनमें से भी 2 स्कीम्स विवादों में उलझ चुकी हैं।

फ्री बस सर्विस स्कीम की लॉन्चिंग के दौरान पूर्व CM अरविंद केजरीवाल।

फ्री बस सर्विस स्कीम की लॉन्चिंग के दौरान पूर्व CM अरविंद केजरीवाल।

अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,

QuoteImage

मैं महिलाओं को 2,100 रुपए महीना दिलाकर रहूंगा। फ्री बस सर्विस बंद नहीं होने दूंगा, ये मेरा वादा है। भले ये मुझे 10 बार जेल में डाल दें।

QuoteImage

सवाल 5: दिल्ली सरकार के अफसरों ने कब-कब अपने मंत्रियों की बात काटी? जवाबः दिल्ली सरकार और ब्यूरोक्रेसी के बीच हुई अनबन के 4 बड़े किस्से…

1. नवंबर 2024: दिल्ली सरकार में पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने एक मीटिंग बुलाई, जिसमें संबंधित विभाग के बड़े अधिकारी नहीं पहुंचे। इस वजह से मंत्री राय ने मीटिंग कैंसिल कर दी। यह पहली बार दिल्ली की राज्य सरकार में हुआ, जब मंत्री के बुलावे पर अधिकारी नहीं पहुंचे।

2. अगस्त 2024: दिल्ली के तत्कालीन CM अरविंद केजरीवाल के जेल में होने के चलते मंत्री गोपाल राय ने GAD के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन कुमार चौधरी को एक पत्र लिखा। राय ने लिखा कि केजरीवाल की जगह 15 अगस्त को आतिशी दिल्ली में तिरंगा फहराएगी। इस पत्र का रिप्लाई करते हुए चौधरी ने इसे अवैध बता दिया।

3. अगस्त 2024ः केजरीवाल सरकार में मंत्री राजकुमार आनंद ने अप्रैल में इस्तीफा दे दिया। 6 अगस्त को मंत्री गोपाल राय ने GAD के अतिरिक्त मुख्य सचिव नवीन कुमार चौधरी को पत्र लिखा। इस पत्र में राय ने आनंद के सभी विभागों के अधिकारियों को आतिशी को रिपोर्ट करने का आदेश देने के लिए कहा, लेकिन मुख्य सचिव ने नियमों का हवाला देते हुए इससे मना कर दिया।

4. मई 2023: दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सर्विसेज विभाग के सचिव आशीष मोरे को हटाने का फैसला किया था। मंत्री सौरभ के इस फैसले की सूचना आशीष मोरे को मिल गई। इसके बावजूद उन्होंने सरकार के आदेश को अनदेखा कर दिया।

सवाल 6: अन्य राज्यों के अफसर CM और मंत्री से डरते हैं, तो दिल्ली के अधिकारी क्यों नहीं? जवाबः 19 मई 2023 को केंद्र सरकार राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) अध्यादेश लेकर आई। इसके तहत दिल्ली के अधिकारियों का ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े अंतिम फैसला लेने का हक उपराज्यपाल यानी LG को दे दिया गया।

इस अध्यादेश के मुताबिक, दिल्ली में तैनात ‘दानिक्स’ कैडर के ‘ग्रुप-ए’ अधिकारियों से जुड़े फैसले राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण यानी NCCSA करता है। इसमें अफसरों के ट्रांसफर से लेकर उनके खिलाफ डिसिप्लिनरी प्रोसीडिंग्स जैसी कार्रवाई शामिल हैं। दानिक्स कैडर यानी दिल्ली, अंडमान एंड निकोबार, लक्षद्वीप, दमन एंड दीव, दादरा-नगर हवेली के सिविल सर्विस अधिकारी हैं।

राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण में 3 मेंबर होते हैं।

1. दिल्ली के मुख्यमंत्री (अध्यक्ष) 2. दिल्ली के मुख्य सचिव 3. दिल्ली के गृह प्रधान सचिव

प्राधिकरण को सभी दानिक्‍स के अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े डिसीजन लेने का हक होता है। आखिरी फैसला LG लेते हैं। यानी अगर LG को प्राधिकरण का कोई फैसला ठीक नहीं लगा, तो वो उसे बदलने के लिए वापस लौटा सकते हैं। फिर भी अगर प्राधिकरण इसमें चेंज नहीं करता है, तो लास्ट डिसीजन LG का ही होता है।

वहीं, दूसरे राज्यों में अफसरों की ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार राज्य सरकार के पास होता है। ऑल इंडिया सर्विसेज एक्ट 1969 के मुताबिक, किसी भी राज्य सरकार के तहत काम करने वाले अफसरों पर केंद्र सरकार किसी भी तरह का एक्शन नहीं ले सकती है। इसमें ट्रांसफर और पोस्टिंग के मामले भी शामिल है। इस कानून के तहत ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों की नियुक्तियां होती हैं।

सवाल 7: क्या विज्ञापन छपवाने वाले अफसरों पर कोई कार्रवाई कर सकती हैं CM आतिशी? जवाबः दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने एक बयान जारी कर इन दोनों नोटिस को झूठा बताया। CM आतिशी ने कहा, ‘जो नोटिस आज छपे हैं, वो गलत हैं। कुछ अफसरों पर भाजपा ने दबाव बनाकर गलत सूचना छपवाई है। अफसरों के खिलाफ एडमिनिस्ट्रेटिव और पुलिस कार्रवाई होगी। कैबिनेट का नोटिफिकेशन जनता के बीच आया है।’

25 दिसंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली की CM आतिशी और पूर्व CM अरविंद केजरीवाल।

25 दिसंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली की CM आतिशी और पूर्व CM अरविंद केजरीवाल।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) अध्यादेश, 2023 के मुताबिक, दिल्ली की CM आतिशी सीधे अफसरों पर कोई एक्शन नहीं ले सकती हैं। अफसरों पर ट्रांसफर, सस्पेंड या किसी भी तरह के एक्शन के लिए उन्हें नेशनल कैपिटल सिविल सर्विस अथॉरिटी में मामले को ले जाना होगा। जहां उनके साथ दिल्ली के मुख्य सचिव और गृह प्रधान सचिव मामले पर चर्चा करेंगे।

दिल्ली के मुख्य सचिव और गृह प्रधान सचिव केंद्र सरकार नियुक्त करती है, ऐसे में वो किसी एक्शन का समर्थन नहीं करेंगे। अगर फिर भी अथॉरिटी कोई एक्शन लेने का फैसला करती है, तो उसमें आखिरी फैसला दिल्ली के उपराज्यपाल का होगा।

———-

रिसर्च सहयोग- आयुष अग्रवाल

———-

दिल्ली सरकार से जुड़ी अन्य खबर पढ़ें

दिल्ली में 60 साल से ऊपर बुजुर्गों का मुफ्त इलाज: चुनाव से पहले केजरीवाल की तीसरी बड़ी घोषणा, महिलाओं-ऑटोवालों के लिए ऐलान कर चुके

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को बुजुर्गों के लिए संजीवनी योजना का ऐलान किया। दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले केजरीवाल ने घोषणा की कि 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों का मुफ्त इलाज होगा। पूरी खबर पढ़ें…

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *