स्पोर्ट्स डेस्क10 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में ऋषभ पंत को चौथ टेस्ट में बॉल लग गई थी।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने प्लेइंग कंडीशंस में बदलाव करते हुए आने वाले घरेलू सीजन में इंजरी रिप्लेसमेंट की इजाजत दे दी है। अगर किसी खिलाड़ी को गंभीर चोट लगती है और वह मैच में आगे खेलने की स्थिति में नहीं होता है तो उसकी जगह दूसरे खिलाड़ी को मौका मिलेगा। यह नियम मल्टी-डे घरेलू मैचों में लागू होगा। यानी ऐसे मैचों में जो एक से ज्यादा दिन तक चलते हैं।
इंग्लैंड में हाल ही में हुई एंडरसन-तेंदुलकर सीरीज में ऋषभ पंत को चोट लगी थी। इसके बाद इंग्लैंड के तेज गेंदबाज क्रिस वोक्स भी चोटिल हुए थे। नियमों के मुताबिक किसी खिलाड़ी को तभी रिप्लेस किया जा सकता है जब चोट सिर में लगी हो। इसे कनकनशन रिप्लेसमेंट कहते हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में यही नियम लागू है। हालांकि, भारत में होने वाले घरेलू क्रिकेट के लिए BCCI ने बाकी चोट में भी रिप्लेसमेंट की अनुमति देने का फैसला किया है।
क्या हैं नया नियम अगर किसी खिलाड़ी को मैच के दौरान गंभीर चोट लगती है, तो रिप्लेसमेंट की अनुमति दी जा सकती है। यह चोट खेल के दौरान और मैदान के अंदर ही लगी होनी चाहिए।
इस बदलाव पर कई प्लेयर्स की अलग-अलग राय है। इंग्लिश टेस्ट कैप्टन बेन स्टोक्स ने इसे मजाक बताया, वहीं गौतम गंभीर ने इसका स्वागत किया। भारत के ऋषभ पंत और इंग्लैंड के क्रिस वोक्स दोनों को चौथे और पांचवें टेस्ट में गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद वे मैच में भाग नहीं ले पाए थे।

पंत को वोक्स की स्लोअर यॉर्कर दाहिने पैर में लगी थी।

पंत को वोक्स की स्लोअर यॉर्कर दाहिने पैर में लगी थी।
मैं इसके पक्ष में हूं- गंभीर ऋषभ पंत की चोट के बाद हेड कोच गौतम गंभीर ने कहा,

मैं बिल्कुल इसके पक्ष में हूं। अगर अंपायर और मैच रेफरी को लगे कि चोट गंभीर है, तो सब्स्टीट्यूट देना बहुत ज़रूरी है। इसमें कोई बुराई नहीं है, खासकर ऐसी सीरीज में जहां पहले तीन टेस्ट कड़े मुकाबले रहे हों। सोचिए हमें 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ता तो कितना दुर्भाग्यपूर्ण होता।
यह बिल्कुल मजाक है- बेन स्टोक्स ओवल टेस्ट में जब वोक्स का कंधा उतर गया तब इंग्लिश कप्तान बेन स्टोक्स ने कहा,

यह बिल्कुल मजाक है। इससे टीमें कमजोरियां ढूंढ लेंगी। आप जब 11 चुनते हैं तो चोट भी खेल का हिस्सा है। मैं कन्कशन रिप्लेसमेंट समझता हूं, क्योंकि उसमें प्लेयर की सुरक्षा की बात है। लेकिन इंजरी रिप्लेसमेंट पर बात बंद होनी चाहिए।
BCCI ने अंपायरों की वर्कशॉप में जानकारी दी नए प्लेइंग कंडीशंस की जानकारी BCCI ने अहमदाबाद में अंपायरों की चल रही वर्कशॉप में दी। BCCI ने साफ किया है कि यह नियम सफेद गेंद क्रिकेट (सैयद मुश्ताक अली, विजय हजारे) में लागू नहीं होगा। IPL में यह लागू होगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है। लेकिन CK नायडू ट्रॉफी (U-19 मल्टी-डे टूर्नामेंट) में यह लागू रहेगा।

पांचवें टेस्ट में क्रिस वोक्स के कंधे में चोट लगी थी। इसके बाद उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा था।
नीचे बदले हुए नियम के बारे में विस्तार से जानिए
- अगर खिलाड़ी को मैच के दौरान गंभीर चोट लगती है तो रिप्लेसमेंट दिया जाएगा अगर चोट किसी भी प्लेयर्स को मैदान के अंदर लगेगी तो इसका रिप्लेसमेंट दिया जा सकेगा। इसमें कोई प्लेयर बॉल लगने से, फ्रैक्चर और डिस्लोकेशन से चोटिल हुआ हो। चोट इतनी गंभीर हो कि खिलाड़ी मैच में आगे भाग न ले सके। तब उस खिलाड़ी को नया रिप्लेसमेंट दिया जाएगा।
- शॉर्ट रन हुआ तो फील्डिंग टीम स्ट्राइकर का फैसला करेगी अगर बैटिंग टीम के प्लेयर्स जान-बूझकर शॉर्ट रन लेते हैं तो फील्डिंग टीम तय करेगी कि दोनों में से कौन सा स्ट्राइकर अगली गेंद के लिए बैटिंग करेगा। यह नियम क्रिकेट इतिहास में पहली बार ही लाया जा रहा है। यह IPL और BCCI के घरेलू क्रिकेट में ही अपनाया जाएगा।
- ऑन-फील्ड अंपायर गंभीर चोट का आकलन करेंगे ग्राउंड में मौजूद ऑनफील्ड अंपायर गंभीर चोट का आकलन करेंगे और रिप्लेसमेंट की इजाजत देंगे। वे मैच रेफरी और डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।
- टीम मैनेजर को मैच रेफरी को एक फॉर्म देना होगा जिसमें चोटिल खिलाड़ी का नाम, चोट कब और कैसे लगी, और यह पुष्टि हो कि वह आगे नहीं खेल सकता। रिप्लेसमेंट खिलाड़ी का नाम, जो लाइक फॉर लाइक (समान भूमिका वाला) होना चाहिए।
- टॉस के समय सब्स्टीट्यूट लिस्ट देनी होगी रिप्लेसमेंट केवल उन्हीं खिलाड़ियों में से चुना जाएगा जो टॉस के समय बतौर सब्स्टीट्यूट नामित किए गए हों। सिर्फ विकेटकीपर की गंभीर चोट की स्थिति में बाहर से कीपर बुलाने की अनुमति होगी, अगर सब्स्टीट्यूट में कोई कीपर न हो। मैच रेफरी रिप्लेसमेंट की अनुमति तभी देंगे जब उन्हें लगे कि नया खिलाड़ी टीम को अनुचित फायदा नहीं देगा।
- मैच रेफरी का फैसला आखिरी होगा मैच रेफरी का फैसला आखिरी होगा, किसी टीम को अपील का हक़ नहीं होगा। रिप्लेसमेंट खिलाड़ी को वही पेनल्टी, वार्निंग या टाइम आउट लागू रहेंगे जो चोटिल खिलाड़ी पर थे। एक बार रिप्लेसमेंट मान्य हो गया तो चोटिल खिलाड़ी मैच में दोबारा नहीं लौट सकेगा। दोनों खिलाड़ी (चोटिल और रिप्लेसमेंट) रिकॉर्ड और आंकड़ों में मैच खेले माने जाएंगे।